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भारत में 2025 में कार्बन उत्सर्जन में दो दशकों में सबसे धीमी वृद्धि: CREA विश्लेषण


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नई दिल्ली, भारत | 27 अप्रैल 2024

हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2025 में कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि की गति पिछले दो दशकों में सबसे कम दर्ज की गई है। इस कमी में सबसे महत्वपूर्ण योगदान विद्युत क्षेत्र से उत्सर्जन में कमी का रहा है, जो पहले वर्ष 2021 से 2023 के बीच उत्सर्जन वृद्धि का प्रमुख कारण था।

CREA (क्लाइमेट एनालिटिक्स रिसर्च एंड एन्वायरनमेंटल एसोसिएशन) द्वारा किए गए इस विश्लेषण से पता चलता है कि विद्युत उत्पादन क्षेत्र में उत्सर्जन में गिरावट ने कुल उत्सर्जन वृद्धि को काफी हद तक नियंत्रित किया है। रिपोर्ट कहती है कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों का बढ़ता इस्तेमाल और सरकार की जलवायु-हितैषी नीतियाँ इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत का यह कदम वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पिछले तीन वर्षों में, भारत ने सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है, जिससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी आई है और इससे कार्बन उत्सर्जन में धीरे-धीरे कमी देखी गई है।

CREA के प्रमुख विश्लेषक डॉ. अमित वर्मा ने कहा, “2021 से 2023 तक बिजली क्षेत्र उत्सर्जन वृद्धि का लगभग 50% हिस्सा था, इसलिए इसे नियंत्रित करना उत्सर्जन को धीमा करने में सबसे प्रभावशाली कदम रहा। यह भारत के पर्यावरण सुधार प्रयासों को मजबूत करता है।” उन्होंने आगे कहा कि इस सफलता को और बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि देश अपनी 2030 उत्सर्जन घटाने की प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सके।

सरकारी सूत्रों ने भी इस रिपोर्ट को एक सकारात्मक संकेत के रूप में स्वीकार किया है। ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि देश में हरित ऊर्जा शुरू करने की दिशा में काफी प्रगति हुई है, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम हुआ है। इसके अलावा, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू किए गए नए नियमों का भी इस कमी में योगदान है।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भारत को अपनी प्रगति को गति देने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में और अधिक निवेश करना चाहिए, साथ ही औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र में भी उत्सर्जन नियंत्रण उपायों को मजबूत करना होगा। केवल तभी भारत वैश्विक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।

इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भारत अपने विकास और पर्यावरण सुरक्षा दोनों को संतुलित रूप से स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जो न केवल देश के लिए बल्कि ग्लोबल पर्यावरण के लिए भी शुभ संकेत है।

अंत में कहा जा सकता है कि 2025 में भारत में कार्बन उत्सर्जन वृद्धि में आई इस धीमी गति ने देश के पर्यावरण सुधार प्रयासों को नई ऊर्जा दी है और भविष्य के लिए उम्मीदें बढ़ाई हैं।


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