
राजस्थान में फर्जी डॉक्टर गिरोह का भंडाफोड़: RMC रजिस्ट्रार समेत 18 गिरफ्तार
Fake Doctor Racket Busted in Rajasthan
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राजस्थान में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर बनाने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में विशाल बंसल के नेतृत्व में जांच करते हुए कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा और नोडल अधिकारी अखिलेश माथुर भी शामिल हैं।

🔍 फर्जी FMGE प्रमाण पत्र से बन रहे थे डॉक्टर
जांच में सामने आया कि आरोपी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) के कूट रचित (फर्जी) प्रमाण पत्रों के जरिए डॉक्टर बन रहे थे। इसके बदले अभ्यर्थियों से 20 से 25 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूली जाती थी।
- अब तक 90 से अधिक संदिग्ध डॉक्टर चिन्हित किए गए हैं
- इनमें से कई ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन प्राप्त किया
- गिरफ्तार आरोपियों में 15 विदेशी MBBS डिग्रीधारी डॉक्टर और एक दलाल शामिल है
🚨 इंटर्नशिप के दौरान खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी पीयूष त्रिवेदी फर्जी FMGE प्रमाण पत्र के आधार पर करौली में इंटर्नशिप कर रहा था। SOG ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि:
- फर्जी प्रमाण पत्र दिलाने में देवेंद्र, शुभम और भानाराम की अहम भूमिका थी
- इसके बाद SOG ने इन सभी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया
🏥 उदयपुर में फर्जी डॉक्टर सक्रिय
उदयपुर से गिरफ्तार आरोपी डॉ. यश पुरोहित एक निजी अस्पताल में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहा था, जिससे लोगों की जान को गंभीर खतरा था।
💰 RMC अधिकारियों की मिलीभगत उजागर
जांच में यह भी सामने आया कि RMC के तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी दलालों के साथ मिलकर:
- हर अभ्यर्थी से 20–25 लाख रुपये वसूलते थे
- इसमें से करीब 11 लाख रुपये RMC अधिकारियों/कर्मचारियों को मिलते थे
- बाकी रकम दलालों में बांटी जाती थी
यह पूरा नेटवर्क एक संगठित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का बड़ा रैकेट बन चुका था।
⚖️ FIR दर्ज, जांच जारी
मामले में RMC अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद FIR दर्ज की गई है और SOG आगे की जांच कर रही है। संभावना है कि आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
✅ निष्कर्ष:
यह मामला न केवल चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। SOG की यह कार्रवाई स्वास्थ्य प्रणाली में फैले भ्रष्टाचार पर एक बड़ा प्रहार मानी जा रही है।



