
क्या राजा रवि वर्मा ने सबसे पहले यशोदा और कृष्ण की छवि पेंट की? ₹167 करोड़ का रहस्य
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /var/www/9d3b87cf-5635-42c8-8024-fd11b68e14cb/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
नई दिल्ली। भारतीय कला जगत में एक बार फिर से राजा रवि वर्मा की एक खास कृति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। प्रतिष्ठित कला इतिहासकार अश्विन ई. राजगोपालन ने एक ऐसी पेंटिंग का अध्ययन किया है जो यशोदा और बाल कृष्ण की छवि को लेकर राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध धारणाओं को चुनौती देती है। इस विश्लेषण के बाद, इस पेंटिंग एवं बड़ौदा के पैलेस की स्टेन ग्लास कला को लेकर सवाल उठे हैं, जो कि एक ₹167 करोड़ की अमूल्य कृति के स्वरूप और श्रेय को लेकर विवाद का संकेत दे रहे हैं।
राजगोपालन ने अपनी जांच में प्रथम रूप से उस पेंटिंग के स्रोत, कार्यशाला प्रथाओं, और कलाकार के हस्ताक्षर संबंधी पहलुओं को गहराई से परखा। उनकी रिपोर्ट में यह बात उभरी कि क्या राजा रवि वर्मा ने वास्तव में सबसे पहले यशोदा और कृष्ण की यह छवि रची थी, या फिर यह किसी उनके नजदीकी कार्यशाला सदस्य या अन्य कलाकार की रचना है। इस शोध से कला का इतिहास फिर से बहस का विषय बन गया है।
इतिहासकारों का मानना है कि रवि वर्मा ने भारतीय कला में पश्चिमी तकनीकों का समावेश कर लोक कला को नई दिशा दी। लेकिन राजगोपालन की जांच से यह भी पता चला है कि कई बार उनके नाम से जुड़ी पेंटिंग्स असल में उनकी कार्यशालाओं के अनुभवी कलाकारों ने बनाई होंगी, जिन्हें तब प्रथम कलाकार का क्रेडिट मिल जाता था। स्टेन ग्लास के संदर्भ में भी बड़ौदा पैलेस की एक कृति में रवि वर्मा के नामांकन को लेकर गहरा विश्लेषण हुआ है, जिसके परिणाम सामने आने बाकी हैं।
यह विवाद केवल कला की प्रामाणिकता और मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ₹167 करोड़ की भारी कीमत जुड़ी है, जो इस कृति की सांस्कृतिक और आर्थिक अहमियत को दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और विस्तृत शोध भारतीय कला इतिहास को सटीकता प्रदान करने में सहायक होगा।
इस बीच, भारतीय कला प्रेमी और संग्रहकर्ता इस बहस को निगाहों के केंद्र में रखे हुए हैं। भविष्य में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किस कलाकार ने क्या-क्या योगदान दिया, जिससे कला की वास्तविक विरासत सुरक्षित रहे और कलाकारों के कार्यों को न्याय मिल सके।



