
आखों में टीबी की सूजन इलाज के बाद भी बनी रह सकती है, अध्ययन में हुआ खुलासा
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नई दिल्ली। हाल ही में आई एक महत्वपूर्ण शोध रिपोर्ट में सामने आया है कि आंखों में होने वाली तपेदिक (टीबी) संक्रमण से जुड़ी सूजन, जिसे ट्यूबरकुलर सर्पिजिनस-लाइक कोरॉइडाइटिस (TB-SLC) कहा जाता है, इलाज के बाद भी बनी रह सकती है। यह अध्ययन एलवी प्रसाद आई आई इंस्टीट्यूट (LVPEI), कोले आई इंस्टीट्यूट, क्लिवलैंड (अमेरिका), और एबीओ आई इंस्टीट्यूट, नागपुर के संयुक्त शोध समूहों ने किया है।
TB-SLC एक दुर्लभ लेकिन गंभीर प्रकार का आंखों का टीबी संक्रमण है जो खासतौर पर आंख के पीछे स्थित रेटिना को प्रभावित करता है। रेटिना की क्षति से दृष्टि हानि का खतरा बढ़ जाता है, जो समय पर सही इलाज न होने पर स्थायी भी हो सकता है। शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि यहां तक कि पूरी तरह से टीबी संक्रमण विकसित हो जाने और इलाज हो जाने के बाद भी, सूजन की यह अवस्था आंखों में लंबे समय तक बनी रह सकती है, जिससे रोगी को बार-बार नए दृष्टि संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डॉ. रामचंद्र शेट्टी, एलवी प्रसाद आई आई इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विशेषज्ञ, ने बताया कि “TB-SLC से प्रभावित मरीजों में प्रगतिशील सूजन के चलते आंखों के अन्य भागों को भी खतरा रहता है। इसलिए, पूरी तरह उपचार के बाद भी उनका सावधानी से निरंतर परीक्षण आवश्यक है।” उन्होंने यह भी कहा कि उपचार योजना में सूजन की सतत निगरानी और जरूरत पड़ने पर इलाज में बदलाव रोगी की दृष्टि बचाने के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका की कोले आई इंस्टीट्यूट की टीम ने इस शोध में आधुनिक दृष्टि जांच तकनीकों और इमेजिंग प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया है ताकि सूजन और उसके पैटर्न का सटीक आकलन किया जा सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षित और जागरूक रोगियों के लिए नियमित फॉलो-अप बेहद जरूरी है।
नागपुर के एबीओ आई इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने कहा कि भारत जैसे टीबी प्रबल देश में इस प्रकार की आंखों की समस्याओं को पहचानना और समय पर इलाज कराना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टीबी के रोगियों और आंखों के प्रदर्शन संबंधी लक्षणों वाले सभी मरीजों को आंखों के विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए ताकि पता चल सके कि सूजन आंखों में कितनी बढ़ी है और इसका इलाज कैसे करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, TB-SLC का इलाज केवल एंटी-ट्यूबरकुलर दवाओं से नहीं होता, बल्कि सूजन को कम करने के लिए स्टेरॉयड थेरेपी और इम्यूनोमॉड्यूलेटर दवाओं की जरूरत हो सकती है। इसीलिए, इलाज के दौरान निगरानी और रोगी की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना नितांत आवश्यक माना गया है।
इस शोध के प्रकाशन ने अब कहा है कि आंखों में तपेदिक से जुड़ी सूजन को केवल संक्रमण खत्म हो जाने पर भी खत्म नहीं समझना चाहिए। बल्कि, इससे बचाव और इलाज के लिए नए दिशानिर्देश बनाने की जरूरत है। यह रिपोर्ट न केवल चिकित्सकों के लिए मार्गदर्शक है, बल्कि आंखों के रोगियों और उनके परिजनों को भी सावधानी बरतने की चेतावनी देती है।
आखिरकार, संक्रमित किसी भी व्यक्ति को सलाह दी जाती है कि यदि उन्हें आंखों से संबंधित कोई भी असामान्य लक्षण महसूस हो, तो बिना देरी के आंखों के विशेषज्ञ से मिलें। समय पर जांच से न केवल आंखों का बचाव होगा, बल्कि दृष्टि हानि का खतरा भी कम किया जा सकता है।



