
तीन शिक्षा विशेषज्ञों को सुप्रीम कोर्ट ने NCERT अध्याय पर जारी की फटकार, सुनवाई की मांग की
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नई दिल्ली। भारत सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक विशेषज्ञ समिति के गठन की जानकारी दी है, जिसमें पूर्व सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. वेणुगोपाल और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह शामिल हैं। इस समिति का उद्देश्य कक्षा 8 समेत अन्य कक्षाओं के लिए NCERT के लीगल स्टडीज़ पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देना है।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला तब उठा जब तीन शिक्षा विशेषज्ञों को NCERT के एक अध्याय को लेकर कड़ी फटकार लगाई गई थी। इसके बाद इन विशेषज्ञों ने कोर्ट से सुनवाई की मांग की थी। इस संदर्भ में सरकार ने कोर्ट को बताया कि विषय से संबंधित कानून और विधि की सही समझ स्थापित करने के लिए एक समर्पित विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
सरकार की ओर से प्रस्तुत इस योजना को न्यायालय ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और कहा कि इस समिति से पाठ्यक्रम की गुणवत्ता बेहतर होगी तथा छात्रों को सही और संतुलित शिक्षा मिलेगी। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि समिति जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे ताकि पाठ्यक्रम को समय पर लागू किया जा सके।
पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. वेणुगोपाल और विश्वविद्यालय कुलपति प्रकाश सिंह की विशेषज्ञता को देखते हुए माना जा रहा है कि यह समिति लीगल स्टडीज़ के शिक्षण को नई दिशा देने में सक्षम होगी। उनका गठन ऐसे समय में हुआ है जब देश के शिक्षा क्षेत्र में न्यायशास्त्र को समझने और पढ़ाने के तरीकों पर बहस जारी है।
NCERT के शिक्षण सामग्री में सुधार को लेकर यह कदम शिक्षा विशेषज्ञों और सरकारी पदाधिकारियों के बीच एक सामंजस्यपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जो स्कूली बच्चों को सही न्यायिक और कानूनी ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस सुधार प्रक्रिया को लेकर विशेषज्ञ समिति जल्द ही विस्तृत समीक्षा करेगी और आवश्यक परिवर्तन लागू करने के लिए सुझाव प्रस्तुत करेगी। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट में अगले चरण की सुनवाई हो सकेगी।
ऐसे में यह कदम सिर्फ शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं बल्कि विद्यार्थियों के कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होगा, जो संविधान और न्यायपालिका के प्रति उनके नजरिए को बेहतर बनाएगा।



