
जयन्ती कुमारेश के वीणा संध्या ने भिलवाड़ा सुर संगम को नया आयाम दिया
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भिलवाड़ा। देश के प्रमुख शास्त्रीय संगीत समारोहों में से एक, भिलवाड़ा सुर संगम इस वर्ष अपने तेरहवें वर्ष में कदम रखते हुए संगीत प्रेमियों को एक नया अनुभव प्रदान कर रहा है। यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम पिछले वर्षों में मुख्य रूप से हिंदुस्थानी शास्त्रीय संगीत को समर्पित था, लेकिन इस बार इसका दायरा बढ़ाकर कर्नाटक संगीत के कलाकारों को भी मंच प्रदान किया जा रहा है।
भिलवाड़ा सुर संगम, जिसे हर साल संगीत के शाश्वत स्वरूपों की प्रस्तुति के लिए जाना जाता है, इस बार की गई इस पहल से दोनों संगीत शैलियों के बीच सांस्कृतिक सेतु स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। उत्सव के आयोजकों का कहना है कि संगीत की महान परंपराओं का मेल यूँ ही संभव है और इससे दर्शकों को भी विविध प्रकार के शास्त्रीय संगीत का आनंद लेने का मौका मिलेगा।
इस वर्ष के आयोजन में जयन्ती कुमारेश की वीणा संध्या को विशेष महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उनकी प्रस्तुति में कर्नाटक संगीत की शास्त्रीयता और भाव सूक्ष्मता के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह पहली बार था जब इस मंच पर कर्नाटक संगीत के कलाकारों को इतने व्यापक रूप से प्रदर्शित किया गया, जिसे संगीत प्रेमियों ने खुले दिल से सराहा।
सुर संगम के आयोजन समिति के सदस्य विनोद शर्मा ने बताया, “हिंदुस्थानी और कर्नाटक संगीत दोनों ही भारतीय शास्त्रीय संगीत के ध्रुवतारे हैं। भिलवाड़ा सुर संगम उन्हें एक मंच पर लाकर उनके बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। इससे लोगों में संगीत के प्रति जागरूकता और सम्मान बढ़ेगा।”
उत्सव के दौरान प्रस्तुत की गई विभिन्न प्रस्तुतियों में पारंपरिक रागों और तालों का सुंदर संगम दिखा, जिससे श्रोताओं को संस्कृति और संगीत की गहराई महसूस हुई। कर्नाटक संगीत के समावेश ने आयोजन को और भी समृद्ध बनाया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविधता में एकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
संगीत प्रेमियों और विशेषज्ञों ने भी इस पहल की सराहना की, कहा कि ऐसे आयोजन संगीत की विरासत को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भिलवाड़ा सुर संगम ने इस बार साबित कर दिया कि शास्त्रीय संगीत केवल एक प्रकार का अभिव्यंजक माध्यम नहीं, बल्कि एक ऐसी संस्कृति है जो सभी को जोड़ती है।
संयुक्त रूप से, भिलवाड़ा सुर संगम का यह १३वाँ संस्करण भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपराओं को समेटते हुए आधुनिक दौर के साथ जुड़ाव की एक मिसाल बना है। आने वाले वर्षों में भी ऐसे आयोजनों से संगीत की समृद्ध विरासत को और अधिक विस्तार मिलेगा, इस उम्मीद के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।



