
विदेश सचिव मिश्री ने परमाणु सहयोग को गहरा करने और एलपीजी निर्यात पर चर्चा के साथ अमेरिका यात्रा समाप्त की
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नई दिल्ली। अमेरिकी राजदूत सर्गेई गोर ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ नागरिक परमाणु सहयोग को बढ़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने कोयला गैसिफिकेशन और अमेरिकी एलपीजी निर्यात के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया है।
राजदूत गोर ने यह बात एक आधिकारिक कार्यक्रम में कही, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रीय और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनका मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग मौजूदा रिश्तों को और मजबूत करेगा।
विशेष रूप से कोयला गैसिफिकेशन के क्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान करने के साथ ही एलपीजी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। कोयला गैसिफिकेशन के इस पैमाने का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस अवसर पर राजदूत गोर ने कहा, “अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझता है और हम ऐसे पूरे भरोसे के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं जो दोनों देशों की प्रगति में सहायक होगा। हम नागरिक परमाणु ऊर्जा, कोयला गैसिफिकेशन, और एलपीजी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को अगली कड़ी में ले जाना चाहते हैं।”
भारत की ऊर्जा खपत तेजी से बढ़ रही है और इस क्षेत्र में निरंतर नवीन तकनीकों को अपनाने और भागीदारी को विकसित करने की आवश्यकता है। ऐसे में अमेरिका के सहयोग से भारत को न केवल ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा भी मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच ये सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भी प्रभावी साबित होगा। इस पहल से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
इस संदर्भ में, अमेरिकी राजदूत का यह स्पष्ट संदेश भारत-अमेरिका संबंधों में ऊर्जा सहयोग को एक नई दिशा देने वाला है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच समझौतों और साझेदारियों की श्रृंखला और बढ़ने की उम्मीद की जा रही है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती आएगी।



