
विदेश सचिव मिस्री ने यू.एस. दौऱा समाप्त किया, परमाणु सहयोग को गहरा करने और एलपीजी निर्यात पर चर्चा की
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नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: यू.एस. के राजदूत सर्जेई गोर ने आज भारत में कहा कि अमेरिका नागरिक परमाणु सहयोग के साथ-साथ कोयले के गैसीकरण और यू.एस. के एलपीजी निर्यात जैसे अन्य क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार है। यह बयान दो देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
राजदूत गोर ने भारत में विभिन्न औद्योगिक और नीति निर्धारक संगठनों से मुलाकात के दौरान कहा, “हम दो राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं। नागरिक परमाणु सहयोग के अलावा, कोयले के गैसीकरण में तकनीकी साझेदारी और एलपीजी निर्यात को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है।”
कोयले के गैसीकरण की प्रक्रिया से भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को और अधिक स्वच्छ एवं कुशल तरीके से पूरा कर सकता है, जबकि एलपीजी उद्योग में अमेरिकी निर्यात से भारतीय बाजार को स्थिर कीमतों और गुणवत्ता वाली आपूर्ति का लाभ मिलेगा। जैसे-जैसे भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को बढ़ा रहा है, ऐसे सहयोग की मांग भी बढ़ रही है।
भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का यह पहलू विशेष महत्व रखता है क्योंकि दोनों देश खुद को सतत ऊर्जा विकास के मार्ग पर स्थापित करना चाहते हैं। अमेरिका की उन्नत तकनीक और भारत की व्यापक ऊर्जा मांग के बीच तालमेल इस साझेदारी को और मजबूत करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संयुक्त प्रयास केवल व्यापारिक हितों को नहीं बढ़ाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक सहयोग को भी नया आयाम देगा। भारत ने पहले भी परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका के साथ मजबूत गठजोड़ किया है, और अब इसमें कोयले के गैसीकरण और एलपीजी जैसे नए क्षेत्र शामिल किए जा रहे हैं।
इस दौरान राजदूत गोर ने यह भी कहा कि दोनों देश सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को और गहरा करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने भारतीय उद्योगपतियों और नीति निर्धारकों से आग्रह किया कि वे इस साझेदारी का फायदा उठाएं और नवाचार व उत्पादन में बढ़ोतरी करें।
अमेरिका के साथ सहयोग को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा कि यह कदम भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और समृद्धि में सहयोगी भूमिका निभाएगा। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते ऊर्जा सहयोग से विश्व स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
इस प्रकार, दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु सहयोग से लेकर ऊर्जा उत्पादन के आधुनिक माध्यमों तक अनेक क्षेत्रों में सहयोग की बात चल रही है, जिससे दोनों राष्ट्रों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी।



