
केंद्र को 4 मई तक ओलंपियन खाशाबा जाधव के प्रति पोस्टह्यूमस पद्म विभूषण देने का निर्णय लेने को कहा: उच्च न्यायालय
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नई दिल्ली, 27 अप्रैल: उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को 4 मई तक ओलंपिक पदक विजेता कुश्ती खिलाड़ी खाशाबा जाधव के लिए पोस्टह्यूमस पद्म विभूषण पुरस्कार देने के संबंध में अपना निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह सुनवाई ‘कुस्तीवीर खाशाबा जाधव फाउंडेशन’ द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर हुई, जिसकी स्थापना खाशाबा जाधव के पुत्र रंजीत जाधव ने की है।
याचिका में यह मांग की गई है कि देश के लिए बहुमूल्य योगदान देने वाले खाशाबा जाधव की सेवा और उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए सरकार उन्हें मृत्यु के बाद भी पद्म विभूषण जैसे उच्चतम नागरिक सम्मान से नवाजे। याचिका में बताया गया है कि जाधव ने 1952 के हेलींक्स ओलंपिक में भारत के लिए पहला कुश्ती में पदक जीता था, परंतु उनकी इस उपलब्धि को देश में उचित स्थान नहीं मिला।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा कि राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक खाशाबा जाधव के सम्मान में क्यों देरी हो रही है और उनसे संबंधित आवश्यक निर्णय कब लिया जाएगा। केंद्र की ओर से सरकार के वकील ने बताया कि पद्म पुरस्कारों के चयन में कई बिंदुओं पर विचार किया जाता है और सरकार प्रक्रिया का सम्मान करती है।
हालांकि न्यायालय ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय नायकों के योगदान को समय बरबाद किए बिना उचित एवं शीघ्र सम्मानित किया जाना चाहिए, जिससे देशवासियों को उनकी गाथा से प्रेरणा मिल सके। न्यायालय ने केंद्र को आदेश दिया कि वे 4 मई तक इस मामले में अंतिम निर्णय लें और याचिका का निवारण करें।
कुश्ती क्षेत्र के जानकार और खेल प्रेमी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं क्योंकि खाशाबा जाधव ने न केवल खेल में भारत का नाम रोशन किया बल्कि देश को ओलंपिक मेडल के क्षेत्र में पहली बार गौरवान्वित भी किया। उनके योगदान को याद करने और उन्हें सम्मानित करने से नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी।
रंजीत जाधव, जो इस फाउंडेशन के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि पिता की विरासत को जीवित रखने का यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। वे आशा करते हैं कि न्यायालय और सरकार मिलकर इस मामले को जल्द से जल्द सकारात्मक तरीके से सुलझाएंगे।
यह निर्णय भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित हो सकता है, जो खेलों और खिलाड़ियों को सम्मानित करने की परंपरा को और मजबूत करेगा। आने वाले दिनों में समाज और खेल से जुड़े लोग इस पहल पर बारीकी से नजर रखेंगे।



