
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में लड़कियों ने छोड़े लड़कों को पीछे; कक्षा 10 और 12 में पास प्रतिशत में वृद्धि
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उत्तराखंड बोर्ड की कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं के परिणामों ने इस बार एक नई कहानी बयान की है। लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ते हुए दोनों कक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने इस सफलता के पीछे शिक्षकों और छात्रों की कड़ी मेहनत को प्रमुख कारक बताया।
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, “हमारे शिक्षकों और छात्रों की समर्पण भावना इन सुधारित अंकों में स्पष्ट झलकती है।” उन्होंने आगे बताया कि सरकार द्वारा लागू की गई नई शिक्षण नीतियों और पाठ्यक्रम सुधारों का भी इन परिणामों में अहम योगदान रहा है।
उत्तरी भारत के इस राज्य में पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष दोनों कक्षाओं का औसत पास प्रतिशत बेहतर हुआ है। खासकर लड़कियों ने परीक्षा में बढ़त हासिल कर शिक्षा के स्तर को नए आयाम दिए हैं। कक्षा 10 की परीक्षा में लड़कियों का औसत पास प्रतिशत 92.5% जबकि लड़कों का 88% रहा। इसी तरह कक्षा 12 में भी लड़कियों ने 90.2% के साथ बेहतर प्रदर्शन किया जबकि लड़कों का औसत 85.7% रहा।
शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए कई विशेष कार्यक्रम चलाए गए जिससे शिक्षा में समानता बढ़ी है। “बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है। इस दिशा में हमने तकनीकी संसाधनों का भी भरपूर उपयोग किया है,” मंत्री रावत ने कहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष की परीक्षा परिणाम लड़कियों की बढ़ती शिक्षा जागरूकता और परिवारों के सहयोग का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सामाजिक और सरकारी स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका असर परिणामों में साफ देखा जा सकता है।
इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ऑनलाईन शिक्षण की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया, जिससे विद्यार्थियों के ज्ञान में कोई कमी नहीं आई। इस समर्पण ने परिणामों में सुधार लाने में मदद की।
राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए नये योजनाओं की घोषणा भी की है, जिसमें डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति योजनाएं शामिल हैं। यह कदम विद्यार्थियों को नये अवसर प्रदान करेगा और राज्य के शैक्षिक मानकों को ऊंचा उठाएगा।
इस प्रकार, उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में लड़कियों की बढ़ती सफलता और कुल मिलाकर पास प्रतिशत में हुई वृद्धि राज्य के शिक्षा क्षेत्र की प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल छात्रों की मेहनत का परिणाम है बल्कि समाज और सरकार की निरंतर कोशिशों का भी प्रमाण है।



