
तमिलनाडु में मच्छर उत्पात: मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रदेशव्यापी हॉटस्पॉट सर्वेक्षण का आदेश दिया
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चेन्नई। तमिलनाडु में मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने आज एक अहम फैसले की घोषणा की। मुख्य न्यायाधीश सुष्रुत अरविंद धर्माधिकारि और न्यायमूर्ति जी. अरुल मूरुगन की डिवीजन बेंच ने तमिलनाडु के सभी नगर निगमों, नगरपालिका परिषदों और ग्राम पंचायतों को निर्देश दिया है कि वे एक विस्तृत सर्वेक्षण करें। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य मच्छरों के घनत्व और उत्पात के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करना है ताकि राज्य सरकार प्रभावी कदम उठा सके।
जुडिशियल आदेश में कहा गया है कि मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में काफी वृद्धि देखी गई है। अदालत ने इस बढ़ती समस्या को गंभीरता से लेते हुए सभी स्थानीय निकायों से अनुरोध किया है कि वे आगामी तीन महीनों के भीतर इस सर्वेक्षण को पूरा करें और उसकी रिपोर्ट उच्च न्यायालय को प्रस्तुत करें।
केंद्रीय एवं राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में डेंगू और मलेरिया के रोगियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों से कहा गया है कि वे इस सर्वेक्षण में मच्छर उत्पन्न होने वाले संभावित स्थल जैसे गंदे पानी के जमा स्थान, निर्माण स्थलों, कूड़ा-करकट के ढेरों, और अन्य नमी वाले क्षेत्रों की जांच करें।
मच्छर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार को सतत अभियान चलाने की सलाह भी दी गई है। अदालत ने निर्देश दिए कि जागरूकता कार्यक्रम और निर्बाध किट वितरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि आम जनता को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए सुसंगत जानकारी मिले।
इस संबंध में तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा, “यह आदेश हमें इस गंभीर समस्या से लड़ने में एक बड़ी मदद देगा। हम स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर इस सर्वेक्षण को शीघ्रता से पूरा करेंगे और सभी हॉटस्पॉट पर त्वरित नियंत्रण उपाय करेंगे।”
विशेषज्ञों का मानना है कि मच्छर नियंत्रण के लिए केवल रसायनिक विधियों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और पर्यावरण स्वच्छता के उपाय भी आवश्यक हैं। अदालत का यह आदेश तमिलनाडु में मच्छर सम्बंधित रोगों से निजात पाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि पिछले कुछ महीनों में मौसमी बदलाव और भारी वर्षा के कारण मच्छरों के प्रजनन में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए नियमित सर्वेक्षण और निगरानी जरूरी है। मद्रास उच्च न्यायालय का यह कदम मच्छर उत्पाती क्षेत्रों की पहचान कर-targeted उपायों की शुरुआत के लिए अहम पहल है।
स्थानीय प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वे अदालत के इस निर्देश का पूरी गंभीरता से पालन करेंगे और सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रभावी रणनीतियाँ लागू करेंगी। इससे तमिलनाडु में मच्छर जनित रोग नियंत्रण में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा और आम जनता की सेहत बेहतर होगी।
अतः, तमिलनाडु के नागरिकों को भी मच्छर नियंत्रण अभियान में सहयोग देना होगा एवं साफ-सफाई और जल संचयन के प्रति जागरूक रहना होगा ताकि वे खुद को और अपने परिवार को बीमारियों से बचा सकें।



