
सब कुछ जानिए: सीमांत व्यक्तित्व विकार के बारे में
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नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: सीमांत व्यक्तित्व विकार (Borderline Personality Disorder) एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जो प्रभावित व्यक्तियों के दैनिक जीवन को गहराई से प्रभावित कर सकती है। इस विकार के शिकार लोग अक्सर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो देते हैं, जिससे उनके रिश्ते, कार्य और सामाजिक जीवन में गंभीर बाधाएं आती हैं।
शोधों के अनुसार, इस स्थिति से प्रभावित व्यक्ति अव्यवस्थित और तीव्र भावनाओं के अधीन होते हैं, जिसके कारण वे बिना लंबे विचार के आक्रामक या असमंजसपूर्ण व्यवहार कर सकते हैं। यही वजह है कि इनके निजी और व्यावसायिक जीवन में समस्याएं बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि सीमांत व्यक्तित्व विकार में व्यक्ति को अस्थिर आत्मछवि, आवेगशीलता, और भावनात्मक अस्थिरता की समस्या होती है। इसके कारण वे अक्सर संबंधों में अस्थिरता, खुद को खालीपन की भावना में डूबते हुए महसूस करते हैं, और आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा सकते हैं।
विशेष रूप से, ऐसे विकार से पीड़ित व्यक्ति अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में असमर्थ होते हैं। वे संबंधों में विश्वास की कमी महसूस करते हैं और अचानक गुस्सा, ईर्ष्या, या अकेलेपन की भावना से अभिभूत हो जाते हैं।
डॉक्टर अरुण कांत, एक मनोचिकित्सक, कहते हैं, “सीमांत व्यक्तित्व विकार का प्रभाव व्यक्ति की सोच, व्यवहार और भावनाओं पर गहरा होता है। सही उपचार और परामर्श से इस विकार को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे प्रभावित व्यक्ति अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकता है।”
इस समस्या के इलाज में मनोचिकित्सा, दवा चिकित्सा और व्यवहारिक थैरेपी शामिल हैं। इसके अलावा, परिवार और मित्रों का सहयोग भी रोगी के सुधार में अहम भूमिका निभाता है।
यदि किसी को या उसके परिचित को इस प्रकार के लक्षण महसूस हों, तो जल्द से जल्द विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए ताकि समय रहते उचित सहायता मिल सके और जीवन सामान्य चल सके।
सीमांत व्यक्तित्व विकार के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक समर्थन देना आवश्यक है ताकि प्रभावित व्यक्ति खुद को अकेला न महसूस करें और वे पूरी क्षमता से जीवन यापन कर सकें।



