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कोर्ग के मेंढकों के छिपे हुए जीवन की झलक


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कोर्ग के गुड़हल पर्वतों में प्रकृति अपनी विविधता के अनगिनत आकर्षणों को समेटे हुए है। हाल ही में, राउंडग्लास सस्टेन की एक नई फिल्म ने इस क्षेत्र के मेंढकों के रहस्यमय जीवन को कैद किया है। इस फिल्म में इकोलॉजिस्ट डॉ. विष्णुप्रिया संकरारामन की यात्रा को दर्शाया गया है, जिन्होंने कोर्ग की सघन बागान क्षेत्रों में लगभग 36 विभिन्न मेंढक प्रजातियों का अध्ययन किया है।

डॉ. विष्णुप्रिया ने बताया कि कोर्ग का जैवविविधता बहुत ही समृद्ध है और यहाँ के मेंढक प्रजातियां केवल वनस्पति और जल स्रोतों से नहीं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र की नमी भरी जलवायु और ठंडी पर्वतीय वायु में अनेक अनोखी प्रजातियॉ पनपती हैं, जिनकी शोध में अभी काफी कुछ अज्ञात तथ्य सामने आ रहे हैं।

राउंडग्लास सस्टेन की इस फिल्म ने न केवल मेंढकों की जीवनशैली, उनके विभिन्न प्रकारों और उनकी आवास स्थलों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस प्रकार ये प्रजातियां स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में सहायता करती हैं। डॉ. विष्णुप्रिया ने कहा, “मेंढक सिर्फ कीट नियंत्रण में मददगार नहीं होते, बल्कि वे पर्यावरण की सेहत का भी संकेतक हैं।”

फिल्म में दिखाया गया है कि कोर्ग में जहाँ प्राकृतिक जंगल और कॉफी प्लांटेशन के बीच एक अनोखा तालमेल नजर आता है, वहीं इन मेंढकों के लिए उपयुक्त आवास भी मौजूद हैं। पर्यावरण संरक्षण और जैवविविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में इस तरह की डॉक्युमेंट्री बेहद प्रभावी साबित हो रही हैं।

कोर्ग के स्थानीय लोग भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं क्योंकि इससे वे अपने आस-पास के पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहे हैं। डॉ. विष्णुप्रिया का मानना है कि “जैसे-जैसे हम मेंढकों के बारे में जानेंगे, वैसे-वैसे हम प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।”

यह फिल्म न केवल कोर्ग की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाती है बल्कि वहाँ की अनदेखी और दुर्लभ जीवों की कहानियों को भी दुनिया के सामने लाती है। राउंडग्लास सस्टेन की यह पहल पर्यावरण प्रेमियों और शोधकर्ताओं दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती जा रही है।

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