
पश्चिम बंगाल में दुर्लभ विरासत आमों को पुनर्जीवित कर रहे हैं उत्पादक और रेस्तरां
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पश्चिम बंगाल में आम के दुर्लभ और विरासत वाली किस्मों को फिर से जीवित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास जोर पकड़ रहा है। कोहितूर की कोमल किस्म से लेकर फ्रैंगिपानी की खुशबू वाले चमपा आम तक, फलोद्यान मालिक, स्थानीय समुदाय और रेस्तरां मिलकर उन प्राचीन किस्मों को संजोने और बढ़ावा देने में लगे हैं, जो कभी बंगाल के शाही बागानों का गौरव थीं लेकिन अब व्यावसायिक खेती के दबाव में धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं।
पश्चिम बंगाल में आम की खेती को लेकर जब औद्योगिक पैमाने पर बड़े-बड़े किसान और कॉर्पोरेट मौजूद हैं, तब भी विरासत किस्मों को संरक्षित करने के लिए स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रयासों का महत्त्व कम नहीं है। ये दुर्लभ किस्में सिर्फ स्वाद में अलग नहीं बल्कि स्थानीय जैव विविधता और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं। फलस्वरूप, इनको पुनर्जीवित करना केवल कृषि का मामला नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान का प्रश्न भी बन गया है।
फलोद्यान मालिक इस दिशा में खास महत्व रखते हैं। वे पुराने पेड़ों को बचाने के साथ-साथ विरासत किस्मों के पौधे लगाने पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इन आमों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है ताकि युवाओं एवं उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़े। कई प्रतिष्ठित रेस्तरां भी इन विरासत आमों का उपयोग अपने व्यंजनों में कर भारतीय विरासत की खुशबू को आधुनिक स्वाद के साथ जोड़ रहे हैं।
वहीं, स्थानीय समुदाय भी इस बदलाव का हिस्सा बनकर अपनी परंपराओं को बचाए रखने में जुटे हैं। वे पारंपरिक तरीकों के साथ खेती करके और प्राकृतिक उत्पादकों के समूह बनाकर आम की इन विरासत किस्मों को बाजार तक पहुंचा रहे हैं। सरकार और कृषि विभाग भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से विरासत फसलों को संरक्षित करने और किसानों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहे हैं।
खास बात यह है कि इन आमों का स्वाद और सुगंध बहुत विशिष्ट होती है। कोहितूर आम की कोमलता और चमपा आम की मनमोहक खुशबू उपभोक्ताओं के बीच खास आकर्षण पैदा कर रही है। विरासत किस्मों का पुनरुद्धार केवल पर्यावरण या सांस्कृतिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी स्थानीय किसानों को सहारा दे रहा है।
इस तरह का प्रयास न केवल पश्चिम बंगाल में कृषि विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बना रहा है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पहचान दिला रहा है। कृषि व भोज्य क्षेत्र में परंपरा और आधुनिकता का यह मिश्रण भविष्य के लिए एक जीवंत उदाहरण साबित हो रहा है।



