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हैदराबाद के बायस चेक थिएटर ने मंटो की कहानियों के संग प्रस्तुत की रंगीन प्रस्तुति


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हैदराबाद। प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर इंजीनियर रह चुके निर्देशक निखिल आहूजा ने हाल ही में एक अनोखा रंगमंचीय प्रदर्शन प्रस्तुत किया है, जिसमें मुंशी प्रेमचंद मंटो की तीन भिन्न कहानियों के माध्यम से समाज की जटिलताओं को सामने रखा गया है। यह नाटक ‘बायस चेक’ नामक थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है, जो नैतिकता, पूर्वाग्रह और सामाजिक विसंगतियों पर गहन प्रकाश डालता है।

निर्देशक निखिल आहूजा ने अपने तकनीकी करियर से रंगमंच की ओर कदम बढ़ाते हुए इस प्रोजेक्ट को चुना है। उन्होंने बताया कि मंटो की कहानियां अपनी सादगी और कटुता के लिए मशहूर हैं, जिनमें समाज के कमजोर पक्षों को बेबाक तरीके से उकेरा गया है। निखिल ने तीन कहानियों का चयन किया है, जो अलग-अलग दृष्टिकोणों और संवेदनाओं को दर्शाती हैं।

इस उल्लेखनीय प्रस्तुति में मानवीय भावनाओं की गहराई, सामाजिक असमानताओं की व्याख्या, और सामयिक विषयों पर विमर्श शामिल है। नाटककारों ने चरित्रों के मनोविज्ञान को बखूबी समझते हुए अभिनय किया, जिससे दर्शकों को पूरी तरह से जुड़ाव महसूस हुआ।

बायस चेक थिएटर के कलाकारों ने मंचन के दौरान सूक्ष्म अभिव्यक्ति और संवाद पर विशेष ध्यान दिया, जिससे मंटो की कहानियों की प्रभावशीलता और भी बढ़ गई। इस परियोजना का मकसद दर्शकों को सोचने पर मजबूर करना है कि किस तरह हमारे समाज में पूर्वाग्रह हमारी सोच और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

निर्देशक निखिल आहूजा ने कहा, “मंटो की कहानियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थीं। हम चाहते हैं कि इस प्रस्तुति के जरिए लोग अपने भीतर झांके और सामाजिक पूर्वाग्रहों पर पुनर्विचार करें।”

यह प्रदर्शन हाल ही में हैदराबाद के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र में हुआ, जिसमें साहित्य प्रेमियों और रंगमंच के जानकारों ने इसे लुभावनी प्रस्तुति के रूप में सराहा।

इस तरह की अनेक परियोजनाएं भारतीय रंगमंच को समृद्ध करने के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। ‘बायस चेक’ का यह प्रयास दर्शाता है कि रंगमंच अपने माध्यम से किसे सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है।

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