
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर लगाया तंज, कहा- नॉर्वे पेंशन फंड ने अडानी के शेयर निकाले पोर्टफोलियो से
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /var/www/9d3b87cf-5635-42c8-8024-fd11b68e14cb/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
फरवरी 2026 में, दुनिया की सबसे बड़ी संप्रभु संपदा निधि, नॉर्वे का $1.2 ट्रिलियन वाला स्वामित्व वित्तीय कोष, अबादानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शेयरों को अपने निवेश पोर्टफोलियो से बाहर करने का निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य कारण कंपनी से जुड़े कथित वित्तीय अपराधों की आशंका बताई गई है।
नॉर्वे की संप्रभु संपदा निधि, जिसे आमतौर पर नॉर्वेजियन पेंशन फंड के नाम से जाना जाता है, विश्व में सबसे बड़ा निवेशक माना जाता है। इस फंड का यह कदम भारतीय निवेश बाजार और विशेष रूप से अडानी समूह के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। निधि प्रबंधन ने कहा कि उन्होंने जांच के बाद अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड को अपने पोर्टफोलियो से हटाने का निर्णय लिया है क्योंकि यह कंपनी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी शक़ायात में है।
भारत में अडानी समूह की प्रतिष्ठा पर इस निर्णय का व्यापक प्रभाव पड़ा है, जहां यह समूह ऊर्जा और अवसंरचना सहित कई क्षेत्रों में अग्रणी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का बाजार आउटफ्लो निवेशकों के बीच गहरी सावधानी और जोखिम को दर्शाता है। वहीं, कंपनी और उसके प्रतिनिधियों ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि वे सभी वित्तीय नियमों और विनियमों का पालन करते हैं।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने इस घटना को केंद्र सरकार की नीतियों की नाकामी के रूप में प्रस्तुत किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा और कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा खोना सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता दर्शाता है। वहीं सरकार ने इस मामले में संयम बरतते हुए जांच प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि नॉर्वे के इस कदम से निवेशकों के लिए भारत के निवेश माहौल की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। यह स्थिति भारत के आर्थिक विकास और विदेशी निवेश आकर्षित करने की क्षमता पर असर डाल सकती है। इसलिए, भारतीय कंपनियों के लिए पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर अधिक जोर देना आवश्यक हो गया है।
इस घटना के मद्देनजर, भारतीय शेयर बाजार में अडानी समूह के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। निवेशक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और भविष्य में विकास की दिशा में होने वाले बदलावों को भी गौर से देख रहे हैं।
फरवरी 2026 की यह खबर भारतीय आर्थिक परिदृश्य में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पता चलता है कि वैश्विक निवेशक किस प्रकार स्थानीय बाजारों के वित्तीय व्यवहार और जवाबदेही को गंभीरता से लेते हैं। देश के लिए यह समय है आत्ममंथन का, ताकि निवेशकों का भरोसा बहाल किया जा सके और वित्तीय नियमों को और सुदृढ़ किया जा सके।
हमसे जुड़े रहने के लिए हमसे सोशल मीडिया पे जुड़े–
https://chat.whatsapp.com/LF1N68UH9AmDru6g9JKm29
https://www.instagram.com/alertrajind
https://www.facebook.com/alertrajind
https://www.youtube.com/@alertrajind



