
रैलियों से रील्स तक: कोलकाता में राजनीतिक नारे बने डांस गीत
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कोलकाता की अब की युवा पीढ़ी क्लबों और नाइटलाइफ़ में राजनीति के नए रंग देख रही है। ममता बनर्जी के लोकप्रिय नारे “हम्बा हम्बा” और भाजपा के ‘‘मच्छ चोर’’ जैसे चुनावी गीतों को अब सिर्फ रैलियों या बैठकों में नहीं, बल्कि डांस फ्लोर पर भी जमकर गुनगुनाया और नचाया जा रहा है। यह बदलाव बंगाल की राजनीतिक और सांस्कृतिक दुनिया में एक नया आयाम जोड़ता दिख रहा है।
पारंपरिक चुनावी गीत और नारे लंबे समय से राजनीति की पहचान रहे हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में संगीतकार और डीजे ने हाल ही में इन नायाब राजनीतिक नारों को टेक्नो और इलेक्ट्रॉनिक बीट्स में अदला-बदली कर युवा वर्ग के लिए आकर्षक बना दिया है। इसी वजह से न केवल चुनाव प्रचार सामग्री के रूप में बल्कि मनोरंजन के साधन के रूप में ये गीत तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संस्कृति के पीछे एक गहरा कारण है। जब सामाजिक और राजनैतिक मुद्दे युवा जीवन का हिस्सा बन जाते हैं, तो वे इन्हें संगीत और नृत्य के जरिए व्यक्त करने लगते हैं। कोलकाता के क्लब गोअर्स खास तौर पर ऐसे गानों को लेकर उत्साहित हैं, क्योंकि ये गीत न केवल मनोरंजन करते हैं बल्कि राजनीतिक संदेश भी प्रभावी रूप से फैलाते हैं।
वहीं, सोशल मीडिया पर भी इन राजनीतिक तकनी इलेक्ट्रॉनिक रिमिक्स का वायरल होना दर्शाता है कि युवा वर्ग इस नए स्वरूप को खुले दिल से अपना रहा है। इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफार्मों पर ऐसे रील्स बनाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है, जो चुनावी जिंगल्स में मजाकिया और मजेदार मोड़ जोड़ रहे हैं।
पर यह सब राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों के बीच नए संघर्ष का सूचक भी माना जा रहा है। अनेक बार ये गीत विवादों और आलोचनाओं का कारण भी बने हैं, क्योंकि राजनीतिक विरोधी पक्ष ऐसे गानों को अपमानजनक मानते हैं। इसके बावजूद, यह बदलाव बंगाल के चुनावी माहौल में एक अलग किस्म की ऊर्जा और संवाद स्थापित कर चुका है।
इस तरह ममता बनर्जी के ‘‘हम्बा हम्बा’’ और भाजपा के ‘‘मच्छ चोर’’ जैसे नारे अब केवल नारे नहीं, बल्कि युवा संस्कृति के रंगीन और जीवंत हिस्से बन चुके हैं, जो राजनीति, मनोरंजन और युवा जीवन के बीच की सीमाओं को धुंधला कर रहे हैं। बंगाल के राजनीतिक संग्राम में यह नया संगीत टूल भविष्य में भी चर्चा का विषय बना रहेगा।
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