
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम विवाद: CBSE द्वारा नियुक्त कंपनी टीelangana परीक्षा गड़बड़ी में संदिग्ध, लग सकता है जुर्माना
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नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू करने वाली कंपनी पर तलसंबंधी जांच का शिकंजा कसता जा रहा है। यह कंपनी हाल ही में तेलंगाना में हुए बोर्ड परीक्षा विवाद के कारण जांच के दायरे में आई है और अब इसे भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों की मानें तो CBSE ने OSM सिस्टम के लिए इस फर्म को तैनात किया था ताकि परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा सके। लेकिन तेलंगाना प्रांत में हुई बोर्ड परीक्षाओं के दौरान इस सिस्टम में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में खासा रोष उत्पन्न हुआ।
परीक्षा परिणामों में विवादों और मार्किंग में भारी विसंगतियों को देखते हुए CBSE ने इस फर्म की कार्यप्रणाली की पड़ताल शुरू कर दी है। खबर है कि तकनीकी खामियां और डेटा हैंडलिंग की समस्याएं इस सिस्टम के कार्यान्वयन में प्रमुख कारण रही हैं। CBSE अधिकारीयों के अनुसार, इस जुर्माने का मकसद ऐसी तकनीकी लापरवाहियों को रोकना और भविष्य में परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना है।
आधिकारिक बयान में CBSE ने कहा कि वे स्थिति की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे। “बोर्ड की प्रतिष्ठा और उम्मीदवारों के हित हमारे लिए सर्वोपरि हैं,” बयान में कहा गया। वहीं, तेलंगाना सरकार ने भी स्थिति की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की है, जो इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मार्किंग प्रणाली में खामियां हों तो छात्र समुदाय के विश्वास को ठेस पहुँच सकती है, इसलिए यह आवश्यक है कि तकनीकी परिपक्वता के साथ ही उचित निगरानी भी बनी रहे। पूर्व की कुछ घटनाओं से मिलती-जुलती समस्याएं पुनः सार्वजनिक भरोसे को कमजोर कर सकती हैं।
CBSE द्वारा संचालित इस प्रणाली की इस विफलता ने शिक्षा जगत में एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि तकनीकीय समाधान के साथ मानवीय निगरानी और पारदर्शिता कितनी महत्वपूर्ण है। छात्र तथा अभिभावक इस प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचा जा सके।
फिलहाल, CBSE का फोकस है दोषों की पहचान कर उन्हें समय पर ठीक करना एवं भविष्य की परीक्षाओं में तकनीकी खामियों से बचना। परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना बोर्ड की प्राथमिकता है, जिससे छात्र उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और मूल्यांकन का लाभ उठा सकें।



