
तहरान ने 47 साल पहले कहा था ‘जरूरी नहीं’: ईरान ने ट्रम्प के मद्देनज़र वार्ता की संभावना नकार दी
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तहरान। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी अंतिम संघर्ष विराम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। इस्पोर्टि में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाके हटाने के दावे को ईरान ने सिरे से नकारते हुए उसे अवैध और संघर्ष विराम के अनुरूप नहीं बताया है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे किसी बाहरी दबाव में नहीं आएंगे और सभी निर्णय खुद अपने स्वाभिमान तथा राष्ट्रीय हितों के आधार पर लेंगे। उन्होंने जोर दिया कि बातचीत का परिणाम केवल शब्दों से नहीं बल्कि कार्यों से निर्धारित होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य रणनीतियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
ईरान का मानना है कि किसी भी समझौते को टिकाऊ बनाने के लिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास एवं सम्मान आवश्यक है। उन्होंने कहा, “हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है कि किसी भी बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा और हम अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
ट्रम्प की ओर से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाका हटाने की घोषणा, ईरान द्वारा इसे संघर्ष विराम के प्रति गैर-न्यायसंगत और अवैध बताया गया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की रणनीतिक कार्रवाई उनके लिए गहरी चिंता का विषय है और वे लगातार अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्पर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह रुख यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय तनाव अभी भी बरकरार है और वार्ता प्रक्रिया को सकारात्मक दिशा देने के लिए दोनों पक्षों को अधिक सावधानी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ना होगा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना कठिन होगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और व्यापारिक नौवहन बाधित न हो। ईरान की यह प्रतिक्रिया उस संदर्भ में आई है जहां अमेरिका अपनी सैन्य गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र में दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
समय के साथ यह देखना होगा कि दोनों देश किस हद तक समझौता करने के लिए तैयार हैं और क्या उनकी पहल से संघर्ष विराम की स्थिति स्थापित हो पाएगी या नहीं। फिलहाल, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल अपने हितों को दृढ़ता से संरक्षण देगा और किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।



