
नियामकीय खामियों के कारण भारत विमान शोर की समस्या से है प्रभावित
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विमान शोर के स्वास्थ्य प्रभावों पर हुए नए अध्ययन से पता चला है कि यह समस्या केवल ध्वनि के स्तर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसका प्रभाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, शोर की तीव्रता के साथ-साथ इसकी आवृत्ति, अवधि और पुनः उत्पत्ति के बीच के अंतराल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोर के बार-बार और लंबे समय तक जारी रहने से लोगों के शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। विशेष रूप से रात में, जब लोग सो रहे होते हैं, तो शोर के कारण ठीक से आराम नहीं हो पाता है, जिससे तनाव, नींद की कमी और हृदय रोग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इस अध्ययन में बताया गया है कि यदि लोगों को अगले शोर के संपर्क में आने से पहले पूर्ण रूप से आराम करने का समय नहीं मिलता, तो इसका प्रभाव और भी नुकसानदेह हो जाता है। यही कारण है कि शोर पर नियंत्रण के लिए केवल ध्वनि की तेज़ी को कम करना पर्याप्त नहीं, बल्कि इसके आवृत्ति और समय को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
भारत में विमान शोर से जुड़ी समस्याएं निरंतर बढ़ रही हैं, जहां नियामकीय प्रावधानों में खामियों के कारण यह समस्या गंभीर रूप ले रही है। मौजूदा नियम शोर प्रदूषण को पूरी तरह रोकने में सक्षम नहीं हैं, साथ ही इससे संबंधित जागरूकता की कमी और उचित निगरानी का अभाव भी इसे और बढ़ावा देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को विमान शोर की वजह से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए कड़े नियामकीय ढांचे की आवश्यकता है। इसके साथ ही, हवाई अड्डों के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के संरक्षण के लिए विशेष उपाय किए जाने चाहिए।
वायुयान शोर पर नियंत्रण न होने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे तनाव, चिंता और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई भी बढ़ती हैं। इसलिए सरकारी एजेंसियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नागरिकों को मिलकर इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा।
इस दिशा में कई देशों ने प्रभावी नीतियां अपनाई हैं, जिनसे विमान शोर को नियंत्रित कर लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है। भारत के लिए आवश्यक है कि वह भी इसी तरह के अनुभवी मॉडल को अपनाए और मौजूदा नियमों में आवश्यक संशोधन करे ताकि विमान शोर से होने वाले व्यापक स्वास्थ्य प्रभावों को कम किया जा सके।



