
मानसून 2026: IMD के INSAT सैटेलाइट इमेजरी से बादलों को कैसे ट्रैक करें
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नई दिल्ली: मानसून केवल वह वर्षा नहीं है जो जमीन पर गिरती है, बल्कि यह उस प्रक्रिया का भी हिस्सा है जिसमें वायुमंडल में कई किलोमीटर ऊपर बनने वाले तूफानों और बादलों को ट्रैक करना शामिल है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस बार मानसून 2026 की मॉनिटरिंग व पूर्वानुमान के लिए INSAT उपग्रह इमेजरी का उपयोग बढ़ा दिया है, जिससे मौसम की सटीक जानकारी मिलने में मदद मिल सके।
INSAT उपग्रहों की मदद से वैज्ञानिक व विशेषज्ञ उच्च गुणवत्ता वाली इमेजरी प्राप्त कर पाते हैं, जो बादलों का वास्तविक समय में विश्लेषण करने में सहायक होती है। इस तकनीक से वर्षा की संभावना, तूफान की गति व दिशा, साथ ही मानसूनी गतिविधियों में होने वाले बदलावों का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
IMD के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अजय शर्मा के अनुसार, “हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम सिर्फ बारिश की मात्रा पर ध्यान न दें, बल्कि वायुमंडल में बनने वाले बादल एवं तूफानों की गतिशीलता को भी समझें, क्योंकि यही पूर्वानुमान के लिए आधार बनते हैं। INSAT उपग्रहों से मिलने वाली इमेजरी से हम क्षेत्रों के बीच मौसम के बदलावों का विश्लेषण बेहतर तरीके से कर पाते हैं।”
इस मानसून सत्र में, INSAT की थर्मल इमेजिंग और एम्प्लीफाइड रेडिएशन तकनीक के माध्यम से बादलों की ऊंचाई, तापमान और सघनता का डेटा हासिल किया जा रहा है। इससे न केवल बारिश का समय अनुमानित होता है बल्कि अचानक आने वाले तूफानों की तीव्रता और फैलाव के बारे में भी जानकारी मिलती है।
मानसून देश की कृषि, जल संसाधन, और सामान्य जनजीवन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक चक्र है। इसके समुचित ट्रैकिंग और विश्लेषण से फसलों की कटाई, पानी की उपलब्धता, और बाढ़-तूफान से बचाव में मदद मिलती है। वर्तमान तकनीकी उन्नति के जरिए, IMD का प्रयास रहता है कि हर वर्ष लोगों को समय पर एवं विश्वसनीय मौसम सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इस तरह, INSAT उपग्रह इमेजरी आधारित बादलों की ट्रैकिंग मानसून 2026 के बेहतर प्रबंधन में क्रांतिकारी भूमिका निभाने जा रही है। जनता, किसान और प्रशासन को भी इन वैज्ञानिक जानकारियों का सही इस्तेमाल करना चाहिए ताकि आम जीवन पर आने वाले विपरीत प्रभावों को कम किया जा सके।
इस मानसून सत्र का पूरा ध्यान न सिर्फ बारिश के आंकड़ों पर, बल्कि बादलों की गतिविधियों पर भी रहेगा। इससे मौसम की पूर्व जानकारी अधिक सटीक व प्रभावी साबित होगी और देश की कल्याणकारी योजनाओं को और मजबूती मिलेगी।



