
बुर्किना आर्मी और जिहादियों ने 2023 से अब तक मारे 1,800 से अधिक नागरिक: ह्यूमन राइट्स वॉच
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /var/www/9d3b87cf-5635-42c8-8024-fd11b68e14cb/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
कैप्टन इब्राहिम त्राओरे पर बुर्किना की सेना और वी डी पी के सभी अत्याचारों के लिए आपराधिक जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए: ह्यूमन राइट्स वॉच रिपोर्ट
नई दिल्ली। ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) की हालिया एक रिपोर्ट में बुर्किना फासो की सेना और स्वयंसेवी रक्षा पलटन (VDPs) द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कैप्टन इब्राहिम त्राओरे पर जोर देते हुए कहा गया है कि उनके ऊपर बुर्किना की सेना और VDPs द्वारा की गई सभी हिंसा और अत्याचारों के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र आपराधिक जांच होनी चाहिए।
HRW की रिपोर्ट के अनुसार 2023 से अब तक बुर्किना फासो में 1,800 से अधिक निर्दोष नागरिकों की घटनाओं में हताहत होने की पुष्टि हुई है। सैन्य बलों और जिहादियों द्वारा समान रूप से निर्दोषों को निशाना बनाया गया, जिससे आम जनता के बीच भय और असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा बलों द्वारा समर्थित VDPs ने भी कथित तौर पर हिंसा में हिस्सा लिया है, जिसके चलते नागरिकों को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। HRW ने कहा है कि इस स्थिति का समाधान न्याय संगत तरीके से किया जाना आवश्यक है ताकि हिंसा पर अंकुश लगाया जा सके।
बुर्किना फासो में पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम अफ्रीका की जिहादियों की गतिविधियां तीव्र हुई हैं, जिससे देश की स्थिरता को काफी नुकसान पहुंचा है। इस संघर्ष के बीच सुरक्षा बलों के दुरुपयोग की भी व्यापक रिपोर्टें सामने आई हैं।
HRW के कार्यकारी निदेशक ने कहा, “बुर्किना फासो के नागरिकों को सुरक्षा और न्याय की आवश्यकता है। नेताओं और सैन्य कमांडरों के खिलाफ कठोर और निष्पक्ष जांच से ही इस स्थिति में सुधार संभव है।”
रिपोर्ट में यह भी उल्लिखित है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्थिति पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। बुर्किना फासो की जनता की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
इस रिपोर्ट के बाद बुर्किना फासो की सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वे मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच कर खुद को जवाबदेह ठहराएं। यह मामला ना केवल देश के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां के संघर्ष का असर पड़ोसी देशों में भी दिखाई देता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि बुर्किना फासो में जल्द से जल्द न्यायिक कार्रवाई शुरू होगी और सुरक्षा बलों की गतिविधियों में पारदर्शिता आएगी। तब तक स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों की सतत भूमिका आवश्यक बनी रहेगी।



