शिक्षा

शिक्षार्थी और शिक्षक मानते हैं कि ‘प्रशिक्षण की कमी’ है अकादमिक क्षेत्र में एआई अंगीकरण की सबसे बड़ी बाधा


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वर्तमान डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग शिक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद अकादमिक संस्थानों में एआई को पूरी तरह अपनाने में कई कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं। एक ताजा सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि छात्रों और शिक्षकों के बीच सबसे बड़ी समस्या इसे अपनाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण की कमी को माना जा रहा है।

शिक्षार्थी और शिक्षक दोनों का मानना है कि एआई के ज़रिए शिक्षा को बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन यदि उचित प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे तो इसका लाभ उठाना मुश्किल होगा। कई शिक्षकों ने बताया कि उन्हें तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण एआई टूल्स को सही तरह से उपयोग करने में दिक्कत आती है। इसके साथ ही, कुछ छात्रों को भी इस तकनीक को समझने और सीखने में समस्या हो रही है।

स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और विज्ञान जैसे कई अन्य शैक्षणिक क्षेत्रों में एआई का प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है, लेकिन शिक्षा के पारंपरिक तरीकों से हटकर नए टेक्नोलॉजी आधारित पाठ्यक्रमों को अपनाने में धीमापन देखा जा रहा है। शिक्षकों और छात्रों दोनों ने सुझाव दिया है कि अगर संस्थान नियमित प्रशिक्षण कार्यशालाएँ और एआई विषय पर व्यावहारिक सत्र आयोजित करें तो इससे उनकी योग्यता में सुधार होगा और एआई तकनीकों को अपनाने में आसानी होगी।

ज्ञात हो कि सरकारी और निजी दोनों ही स्तरों पर शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही है, लेकिन आधारभूत समस्या प्रशिक्षण और उपयुक्त संसाधन उपलब्ध कराना ही बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अकादमिक संस्थान अगर एआई को सिर्फ एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया का एक अभिन्न हिस्सा समझें तो इसके फायदे ज्यादा प्रभावी ढंग से प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि लगभग सभी स्तरों पर प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया जाए और एआई आधारित उपकरणों का सहज और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।

इस प्रकार स्पष्ट है कि एआई की शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने की क्षमता तो है, लेकिन प्रशिक्षण की कमी ने इसे पूरी तरह अपनाने में बाधा उत्पन्न कर रखी है। इस चुनौती के समाधान के बिना एआई का वास्तविक लाभ शिक्षण और अधिगम दोनों के स्तर पर हासिल करना कठिन होगा। इसलिए सभी संबंधित पक्षों की संयुक्त कोशिश और योजनाबद्ध प्रशिक्षण की संभावित रूपरेखा तैयार करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।


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