
विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य पर स्क्रीन के प्रभाव को कम करने के लिए नियमित ब्रेक लेने की सलाह दी
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /var/www/9d3b87cf-5635-42c8-8024-fd11b68e14cb/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
नई दिल्ली। डिजिटल डिवाइस के अत्यधिक उपयोग को लेकर विशेषज्ञों ने एक बड़ी आगाह जारी की है। बच्चों के स्क्रीन टाइम को अचानक बंद कर देना या उनके गैजेट जबरदस्ती छीन लेना उनकी आदतों पर सकारात्मक असर नहीं डालता। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को स्क्रीन उपयोग की आदतों से धीरे-धीरे और समझदारी से जोड़ा जाना चाहिए ताकि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों बन सके।
हाल के वर्षों में मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ा है, खासकर बच्चों में। कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई और मनोरंजन का यह दौर और भी बढ़ गया। हालांकि तकनीक ने जीवन को सरल तो बनाया है लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग बच्चों की सोचने की क्षमता, ध्यान केंद्रित करने की शक्ति और सामाजिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से उनके गैजेट उठाना या उनकी स्क्रीन समय सीमित करना अचानक क्रोध या हिंसक तरीके से करना सही approach नहीं है। इसके बजाय, माता-पिता और शिक्षक मिलकर बच्चे को समझाएं कि डिजिटल उपकरणों का सीमित उपयोग क्यों जरूरी है। साथ ही, उन्हें बाहर खेलने, पढ़ने, और अन्य सामाजिक गतिविधियों में शामिल करके ध्यान हटाने की प्रक्रिया को धीरे-धीरे अपनाना चाहिए।
डॉक्टर और बाल मनोवैज्ञानिक नई स्क्रीन उपयोग आदतें बनाने में सहजता और धैर्य रखने को प्राथमिकता देते हैं। इसके लिए बच्चों को नई गतिविधियों में व्यस्त रखने की सलाह दी जाती है। उन्होंने बताया कि स्क्रीन से ब्रेक लेना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है क्योंकि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की थकान, नींद में बाधा, और चिंता जैसे मानसिक लक्षण हो सकते हैं।
इसके साथ ही, अध्ययनों से पता चला है कि नियमित ब्रेक से परिवारिक संबंध मजबूत होते हैं और बच्चे की उत्पादकता तथा रचनात्मक क्षमता भी बढ़ती है। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि parents और guardians खुद भी डिजिटल उपकरणों का अनुशासित उपयोग कर बच्चों के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश करें।
अंत में, यह स्पष्ट किया गया है कि स्क्रीन उपयोग को नियंत्रित करने की प्रक्रिया में न तो सख्ती हो और न ही अचानक बदलाव। यह एक सतत और समझदारी से भरा कदम होना चाहिए ताकि बच्चे अपने मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना एक स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें।



