
शिवमोगा में कुवेम्पु विश्वविद्यालय में परिणाम घोषित न होने के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं ने वी-सी सचिवालय में तोड़फोड़ की
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शिवमोगा, 27 अप्रैल: कुवेम्पु विश्वविद्यालय में परिणाम घोषित न होने के विवाद को लेकर NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने वीसी (वाइस चांसलर) सचिवालय में हाथपाई और तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया। यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच लंबे समय से चली आ रही असंतोष की भावना का परिणाम है। NSUI कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे छात्रों को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकर्ताओं ने कहा कि कई बार परिणाम सुधार के लिए अपील की गई, लेकिन विश्वविद्यालय ने मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रदर्शन के दौरान, NSUI के सदस्यों ने वी-सी कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की और अंततः कई अधिकारियों के कार्यालयों में तोड़-फोड़ की, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ।
एक वरिष्ठ छात्र नेता ने बताया, “हमने कई बार विश्वविद्यालय को बताया कि परिणामों में गड़बड़ी के कारण हमारे भविष्य पर प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद, प्रशासन ने हमारे मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया। हमने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब हम मजबूर होकर इस रूप में विरोध करने को बाध्य हुए।”
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं और जांच कर रहे हैं। परिणामों में खामियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन कुछ प्रक्रियाओं में समय लग सकता है। हम सभी से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं।”
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विश्वविद्यालयों में इस तरह के विवाद छात्रों के शैक्षणिक एवं मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए प्रशासन और छात्रों के बीच उचित संवाद और पारदर्शिता आवश्यक है।
वर्तमान परिस्थितियों में, यह स्पष्ट है कि कुवेम्पु विश्वविद्यालय को छात्रों के विश्वास को पुनः प्राप्त करने के लिए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। NSUI कार्यकर्ताओं द्वारा की गई यह घटना इस बात का द्योतक है कि छात्रों में अब भी विश्वविद्यालय प्रशासन से उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता और एकजुटता बनी हुई है।
अखिल भारतीय छात्र संगठन के सदस्य भी इस मुद्दे पर समर्थन जता चुके हैं और उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द मुद्दों का समाधान करें ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।



