
संकट मोचन संगीत समारोह में सभी धर्मों के कलाकार हुए हनुमान के दरबार में शामिल
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वाराणसी, 27 अप्रैल: 103 वर्षों से चली आ रही संकट मोचन संगीत समारोह वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और समावेशी भावना का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह महत्वपूर्ण आयोजन संकट मोचन मंदिर के पावन प्रांगण में हुआ, जहां हजारों श्रोताओं ने विभिन्न संगीत शैली और परंपराओं का आनंद लिया।
संकट मोचन संगीत समारोह न केवल भक्ति और संगीत का संगम है, बल्कि यह वाराणसी के विविध धार्मिक व सांस्कृतिक समरसता का परिचायक भी है। यहां कलाकार और दर्शक दोनों ही भेद-भाव से ऊपर उठकर गंथन करते हैं और भगवान हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। इस आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य समुदायों के कलाकार हिस्सा लेते हैं, जो इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता है।
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के पुजारी द्वारा हनुमान जी की आरती और मंत्रोच्चारण से हुई, जिसके बाद विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों और शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किए गए। इस बार समारोह में कहा गया कि संगीत न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों को जोड़ने का एक पुल भी है।
संकट मोचन संगीत समारोह की स्थापना 1921 में महामना मदन मोहन मालवीय ने की थी, जिसका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देना है। इस समारोह ने वर्षों के दौरान बड़ी हस्तियों को मंच प्रदान किया है और वाराणसी की सांस्कृतिक छवि को विश्व स्तर पर स्थापित किया है।
इस बार के समारोह में लोक संगीत, ठुमरी, कथकली, ध्रुपद और कई अन्य पारंपरिक संगीत विधाओं को दर्शाया गया, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले थे। आयोजन में आए दर्शकों ने कहा कि यह आयोजन संपूर्ण भारत में सांस्कृतिक एकता की मिसाल है और वाराणसी के समावेशी चरित्र को दर्शाता है।
समारोह के अंत में आयोजकों ने सभी कलाकारों और दर्शकों का धन्यवाद किया, साथ ही इस परंपरा को आने वाले वर्षों तक जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। संकट मोचन संगीत समारोह न केवल भक्ति संगीत प्रेमियों के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो संस्कृति, एकता और संगीत के महत्व को समझता है।
इस प्रकार, संकट मोचन संगीत समारोह न केवल वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है, बल्कि यह सामाजिक और धार्मिक सद्भाव को भी बढ़ावा देता है। आज भी यह आयोजन उन मूल्यों की स्थिरता का संदेश देता है, जो सदियों से इस पवित्र नगरी को विश्व संस्कृति के मानचित्र पर अलग पहचान देते हैं।



