
नई दिल्ली। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैदराबाद में दिए गए भाषण के तुरंत बाद गुजरात और असम में उनके काफिले का आकार घटा दिया गया है। यह कदम सुरक्षा और प्रबंधन की नई रणनीति के तहत उठाया गया माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, इस बदलाव का मुख्य कारण काफिले की गतिशीलता और सार्वजनिक क्षेत्रों में बेहतर नियंत्रण प्रदान करना है। इस बदलाव से यात्रा के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी अधिक सुदृढ़ होगी तथा काफिले से जुड़ी लॉजिस्टिक चुनौतियों में कमी आएगी।
गुजरात और असम दोनों ही राज्यों में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चरम पर रखी जाती है। ऐसे में काफिले के आकार में कमी से रैली या सार्वजनिक कार्यक्रम में दखल देने वाली संभावनाओं को भी न्यूनतम किया जा सकेगा।
स्रोत बताते हैं कि इस फैसले का मकसद न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत बनाना है बल्कि पीएम की यात्रा को और अधिक नियंत्रित व सुव्यवस्थित करना भी है। हालांकि इस पर आधिकारिक तौर पर कोई बयान अभी तक जारी नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से प्रधानमंत्री की यात्राओं के दौरान असामान्य स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा, छोटे काफिले से भीड़ प्रबंधन आसान होगा, जो सुरक्षा एजेंसाओं के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के हैदराबाद के भाषण के बाद तुरंत ही यह निर्णय लिया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस बदलाव को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इस संदर्भ में अधिकारियों का कहना है कि यह एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें लगातार नए सुरक्षा उपायों को लागू किया जाता है।
गुजरात और असम में काफिले के आकार में इस प्रकार की कटौती देश में सुरक्षा मानकों में उन्नति को दर्शाती है। विशेषज्ञ यह भी कयास लगा रहे हैं कि भविष्य में प्रधानमंत्री के अन्य राज्यों के दौरे में भी इस तरह के कदम देखे जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से उम्मीद है कि जल्द ही इस विषय पर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां नए प्रोटोकॉल के अनुसार काम कर रही हैं और सुनिश्चित कर रही हैं कि प्रधानमंत्री की यात्राओं में किसी प्रकार की कोई बाधा न आए।
इस प्रकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले के आकार में की गई यह कमी सुरक्षा रणनीति में एक नई दिशा की तरफ संकेत करती है। ये बदलाव न सिर्फ सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि सार्वजनिक व्यवस्थापन के हिसाब से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।



