
CBSE 12वीं परिणाम 2026: शिक्षक संगठन ने दिल्ली शिक्षा मंत्री से नोटिस वापस लेने की मांग जताई, OSM पर चिंता प्रकट की
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नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा के परिणाम 2026 के सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों ने दिल्ली में खासा विरोध जताया है। शिक्षक संगठन ने दिल्ली शिक्षा मंत्री से बोर्ड द्वारा जारी किए गए नोटिस वापस लेने की मांग करते हुए ओपन स्कूल मोड (OSM) से जुड़ी कुछ नीतियों पर भी गंभीर चिंता जाहिर की है।
शिक्षक संगठन का दावा है कि कुछ छात्रों को ओपन स्कूल मोड (OSM) के तहत अनियमित तरीके से परिणाम घोषित किए जाने से शिक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि इससे छात्र एवं अभिभावक भ्रमित हो सकते हैं और शिक्षा प्रणाली की साख पर असर पड़ता है।
दिल्ली शिक्षक संघ के प्रधान ने कहा, “हमें यह जानकारी मिली है कि कुछ छात्रों को बिना उचित जांच-पड़ताल के नतीजे जारी किए गए हैं। यह न केवल छात्रों के अधिकारों का हनन है, बल्कि पूरे बोर्ड की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। ऐसे में शिक्षा मंत्री से हम अपील करते हैं कि वे तत्काल नोटिस वापस लें और इस मामले की गहन जांच करें।”
इसके अलावा शिक्षक संगठन ने दिल्ली शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में मांग की है कि ओपन स्कूल मोड (OSM) की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और इसमें सुधार के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याएं न आएं। OSM के तहत शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के परिणामों की देखरेख सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम भी आवश्यक बताया गया है।
वहीं CBSE बोर्ड ने कहा है कि सभी परिणाम नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार जारी किए गए हैं। बोर्ड प्रवक्ता ने बताया कि किसी भी प्रकार के अनियमितताओं की खबर मिलते ही जांच की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से भी अपील की कि वे किसी अफवाह पर ध्यान न दें और आधिकारिक渠道 से ही सूचना प्राप्त करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों के परिणाम को लेकर उठी यह विवादास्पद स्थिति शिक्षा क्षेत्र में सुधार की जरूरत को उजागर करती है। बोर्ड को चाहिए कि वह ओपन स्कूल मोड के नियमों को और अधिक स्पष्ट तथा पारदर्शी बनाए, जिससे छात्रों का विश्वास बना रहे और उन्हें सही समय पर सही जानकारी मिलती रहे।
अंततः यह मामला दिल्ली शिक्षा विभाग तथा सीबीएसई के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकता है कि शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी और पारदर्शिता दोनों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। सभी पक्षों से उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द इस विवाद का समाधान निकालकर छात्रों के हितों की रक्षा करेंगे।



