
NCLAT ने दिवालियापन के दौरान डिमैट खाते की फ्रीजिंग पर BSE की याचिकाएं खारिज कीं
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Mumbai, Maharashtra | April 27, 2024
नैशनल कंपनी लॉ अपीलीट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने हाल ही में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें दिवालियापन की प्रक्रिया के दौरान डिमैट खातों को फ्रीज करने के मसले पर विवाद उठाया गया था। BSE का दावा था कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पास भारतीय दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत अनुभाग 60(5) के तहत इस तरह के मुद्दों पर अधिकार क्षेत्र नहीं है।
BSE की ओर से तर्क दिया गया था कि डिमैट खातों के फ्रीजिंग से जुड़ी समस्याएं केवल सिक्योरिटीज कानून के अंतर्गत आती हैं और इन्हें सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के सर्कुलर्स तथा रेगुलेशंस के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए। इसके विपरीत, BSE का यह भी कहना था कि ये मामले गैर-कानूनी प्रक्रियाओं से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए इन मामलों में NCLT का हस्तक्षेप अनुचित है।
हालांकि, NCLAT ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि दिवालियापन की प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि देनदार की संपत्ति के संरक्षण और अनुचित लाभ को रोका जा सके। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि दिवालियापन कानून के तहत NCLT के अधिकार क्षेत्र में ये मुद्दे आते हैं, खासकर जब संपत्ति की सुरक्षा से संबंधित हों।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से यह संकेत मिलता है कि दिवालियापन की प्रक्रिया में छूट नहीं दी जाएगी और सभी पक्षों को कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए काम करना होगा। SEBI के नियमों का पालन करना आवश्यक है, लेकिन दिवालियापन के तहत सुरक्षा और निष्पादन के लिए ट्रिब्यूनल की भूमिका भी अहम है।
इस फैसले का व्यापक प्रभाव स्टॉक मार्केट और वित्तीय क्षेत्र पर पड़ सकता है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि दिवालियापन केसों में परिसंपत्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। निवेशकों और प्रतिभागियों के लिए यह राहत की बात है कि बाजार में अनुचित गतिविधियों को रोका जाएगा और इस तरह के विवादों में उचित संस्थागत हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाएगा।
वर्तमान में, BSE ने फैसला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के विकल्प पर विचार किया है, जबकि बाजार विशेषज्ञ इस फैसले को दिवालियापन प्रक्रिया को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
कुल मिलाकर, NCLAT का यह निर्णय दिवालियापन और सेल्फ़ रेगुलेशन के बीच संतुलन बनाकर वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने की कोशिश है, जिसके लाभ दूरगामी होंगे।



