
विश्व व्यापार संगठन के ई-कॉमर्स मोरेटोरियम क्या है?
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जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड | 27 अप्रैल 2024
विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने 1998 में अपनी दूसरी मंत्रीस्तरीय कांफ्रेंस के दौरान एक महत्वपूर्ण नीति अपनाई, जिसे ई-कॉमर्स मोरेटोरियम कहा जाता है। यह मोरेटोरियम डिजिटल कारोबार और ऑनलाइन व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई थी। यह नीति सदस्यों को डिजिटल उत्पादों और सेवाओं पर आयात शुल्क लगाने से मना करती है, जिससे वैश्विक ई-कॉमर्स का विकास संभव हो सके।
मोरेटोरियम की शुरुआत तब हुई जब तकनीकी प्रगति ने विश्व व्यापारी परिदृश्य को बदल दिया था और ऑनलाइन व्यापार तेजी से बढ़ रहा था। WTO ने यह फैसला किया कि यदि सदस्यों ने डिजिटल वस्तुओं और सेवाओं पर आयात शुल्क लगाना शुरू कर दिया, तो यह वैश्विक कारोबार के लिए बाधा उत्पन्न करेगा। इसलिए, यह नीति सदस्यों को ऐसे शुल्क लगाने से रोकती है, जिससे व्यापार सुगम और निर्बाध हो सके।
ई-कॉमर्स मोरेटोरियम का प्रभाव विशेष रूप से डिजिटल डेटा, सॉफ्टवेयर, संगीत, फिल्में, और अन्य डिजिटल कंटेंट पर पड़ता है। इससे ये वस्तुएं और सेवाएं अधिक सस्ती और उपभोक्ताओं के लिए सुलभ हुई हैं। उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नीति ने वैश्विक डिजिटल बाजार के विकास में अहम भूमिका निभाई है और छोटे व्यवसायों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का मौका मिला है।
हालांकि, इस मोरेटोरियम के बारे में विभिन्न देशों के बीच मतभेद भी देखे जाते हैं। कुछ विकासशील देश माउसूल लगाकर अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा करना चाहते हैं, जबकि विकसित देशों का तर्क है कि मुक्त व्यापार से सभी का लाभ होगा। WTO में इस विषय पर नियमित चर्चा होती रहती है और भविष्य में इस नीति के विस्तार या संशोधन की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।
इस संदर्भ में, विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्रगति के साथ WTO को अपनी नीतियों को अपडेट करते रहना चाहिए ताकि वैश्विक ई-कॉमर्स का समतल और न्यायसंगत विकास हो सके। यह मोरेटोरियम व्यापार के नए आयाम खोलने के साथ-साथ देशों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान करता है।



