
सीएम सिद्धारमैया ने बागलकोट में बाइपोल अभियान की शुरुआत की, केंद्र को ‘जनविरोधी’ बताया ट्रिब्यूनल फैसले की अधिसूचना न करने पर
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बागलकोट। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बागलकोट में बाइपोल अभियान की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार पर कड़ी टीका-टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केंद्र ने ट्रिब्यूनल के फैसले को अधिसूचित नहीं किया है, जो कि जनविरोधी कार्रवाई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इससे किसान और आम जनता को भारी नुकसान पहुंचा है।
सिद्धारमैया ने कहा कि जब भाजपा राज में राज्य में चार वर्ष सरकार रही, तब भी किसानों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने किसानों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए केंद्र सरकार की उदासीनता को चिंता का विषय बताया।
मुख्यमंत्री ने यह बयान ऐसे वक्त में दिया है जब राज्य में बाइपोल की तारीखें नजदीक आ रही हैं, और इस मुद्दे को चुनावी राजनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है। उनका यह रुख केंद्र सरकार को चुनौती स्वरूप माना जा रहा है, विशेषकर तब जब राज्य में कृषि और किसान मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं।
सिद्धारमैया ने कहा कि ट्रिब्यूनल का फैसला किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण था, और इसे केंद्र द्वारा समय पर लागू किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “किसानों के कल्याण के लिए जो भी फैसले होते हैं, उन्हें जल्द से जल्द लागू किया जाना जरूरी होता है, ताकि गरीब किसानों को राहत मिल सके।”
इस मौके पर उन्होंने केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के साथ जो वादे किये थे, वह पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि किसानों को उचित मुआवजा और सुविधाएं प्रदान करने में केंद्र सरकार विफल रही है। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे इस विपक्षी सरकार के जनविरोधी फैसलों के खिलाफ जागरूक रहें और आगामी चुनावों में इसका सही प्रत्युत्तर दें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धारमैया की यह बात न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण संदेश है। किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच अक्सर मतभेद रहे हैं, और यह बयान उन्हीं दरारों को और बढ़ावा देता नजर आता है।
बागलकोट में इस बाइपोल अभियान की शुरुआत के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता एवं समर्थक भी मौजूद थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के इस कदम का स्वागत किया। कार्यक्रम में कृषि विषयक कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा हुई।
कुल मिलाकर, सिद्धारमैया की यह बयानबाजी आगामी चुनाव और किसान मुद्दों पर केंद्र व राज्य सरकार के बीच जारी तनाव के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है। यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और किसानों के हित में क्या कदम उठाती है।



