
पश्चिम एशिया संकट: जयशंकर ने क़तरी प्रधानमंत्री और यूएई विदेश मंत्री से की बात
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हाल ही में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त कराने के लिए भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। इन प्रयासों का मुख्य लक्ष्य है क्षेत्र में शांति स्थापित करना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से ऊर्जा की अविरत आपूर्ति सुनिश्चित करना। पिछले कुछ सप्ताहों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क़तर के प्रधानमंत्री और यूएई के विदेश मंत्री से इस विषय पर महत्वपूर्ण वार्तालाप किए हैं।
भारत के लिए पश्चिम एशिया क्षेत्र की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से देश को ऊर्जा की एक बड़ी हिस्सेदारी मिलती है। हॉर्मुज की जल मार्ग लगातार ऊर्जा की वाहक साबित होती रही है, इसलिए इसका सुचारू रूप से खुला रहना आवश्यक है। जयशंकर ने कूटनीतिक बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के तरीकों पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान संकट को जल्द से जल्द समाप्त करना भारत की प्राथमिकता है ताकि व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित न हो। साथ ही, भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह सभी पक्षों से शांति वार्ता में भाग लेने और विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील करता है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष की जटिल स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, भारत ने रियाद, अबू धाबी, दोहा सहित कई महत्वपूर्ण राजधानियों में सक्रिय हस्तक्षेप किया है। इन प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास बहाली करना और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए उचित नीति निर्माण करना है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह कूटनीतिक पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगी बल्कि क्षेत्रीय मामलों में भारत की भूमिका और भी प्रभावशाली बनाएगी। आने वाले समय में भारत की यह रणनीति कैसे फल देती है, ये देखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि पश्चिम एशिया का शांति बहाल होना विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी सहायक होगा।
अतः, वर्तमान में भारत की संभालदार कूटनीतिक गतिविधियाँ और संवाद पश्चिम एशिया के संकट के समाधान में एक पॉजिटिव संकेत मानी जा रही हैं। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ते जा रहे हैं, भारत की शांतिपूर्ण पहल क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभा सकती है।



