
ऑस्ट्रेलिया का तकनीकी दिग्गजों पर टैक्स लगाने का इरादा यदि वे समाचार आउटलेट को भुगतान नहीं करते
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ऑस्ट्रेलिया सरकार ने बड़ी तकनीकी कंपनियों से स्थानीय प्रकाशकों को उनकी सामग्री साझा करने पर मुआवजा मांगने की योजना बनाई है। यह कदम उन खबरों के लिए है जो इन प्लेटफॉर्म्स पर ट्रैफिक लाती हैं और जिनके माध्यम से डिजिटल मीडिया उद्योग का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य न्यूज आउटलेट्स को वित्तीय रूप से समर्थन देना है, जो अक्सर अपनी खबरें और सामग्री बड़ी तकनीकी कंपनियों जैसे गूगल और फेसबुक के प्लेटफॉर्म पर साझा करते हैं। इन कंपनियों द्वारा साझा की गई खबरों के कारण, उपयोगकर्ता संबंधित समाचार वेबसाइटों पर भी जाते हैं, जिससे इन समाचार आउटलेट को व्यावसायिक लाभ होता है।
हालांकि, कई बार यह ट्रैफिक पर्याप्त मुआवजा प्रदान नहीं करता, जिससे स्थानीय मीडिया उद्योग को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों का मानना है कि बड़ी टेक कंपनियों को इसके लिए फ़ायसला भुगतान करना चाहिए, ताकि स्थानीय संवाद और पत्रकारिता का समर्थन हो सके।
इस प्रस्तावित कानून के मुताबिक, यदि ये टेक दिग्गज समाचार आउटलेट्स को उचित मुआवजा नहीं देते, तो उन पर टैक्स लगाया जा सकता है। यह नए नियम टेक्नोलॉजी कंपनियों को समाचार संगठनों के साथ फेयर डीलिंग की ओर प्रेरित करने का प्रयास है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम वैश्विक स्तर पर डिजिटल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। इससे न केवल स्थानीय पत्रकारिता को संरक्षण मिलेगा, बल्कि उपयोगकर्ताओं को भी बेहतर समाचार सामग्री उपलब्ध होगी।
इस बीच, बड़ी कंपनियां इस निर्णय की आलोचना भी कर रही हैं, उनका तर्क है कि यह नीति नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। लेकिन सरकार इस विचार पर दृढ़ है कि डिजिटल मीडिया पर स्थानीय प्रकाशकों का अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए।
इस पहल के लागू होने से ऑस्ट्रेलिया में मीडिया उद्योग के बीच आर्थिक संतुलन स्थापित करने के साथ-साथ सूचना के बहुमत को भी सुरक्षित रखने की उम्मीद है। सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर सभी पक्षों से संवाद जारी रखेगी ताकि एक संतुलित और न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके।



