
कैसे डेविड एटेनबोरो ने भारतीयों को प्रकृति को एक नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित किया
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8 मई को डेविड एटेनबोरो अपनी सौवीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो विश्व के प्रमुख प्रकृति-प्रेमियों और संरक्षणविदों में गिने जाते हैं। उनकी जीवनी और वन्यजीवों के प्रति सामर्पित कार्य ने न केवल वैश्विक स्तर पर, बल्कि भारत में भी प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में गहरा प्रभाव डाला है। उनके कार्यों पर भारतीय प्राकृतिकतत्वज्ञ, संरक्षणकर्मी, लेखक, फिल्म निर्माता और वन्यजीव विशेषज्ञ अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।
डेविड एटेनबोरो ने प्रकृति और पर्यावरण के प्रति समाज की सोच को एक नए आयाम दिया है। उनकी डॉक्यूमेंट्री श्रृंखला, जैसे कि ‘ब्लू प्लैनेट’ और ‘प्लैनेट अर्थ’, ने लाखों लोगों के मन में जंगलों, समुद्रों और वन्यजीवों के महत्व को स्थापित किया है। भारतीय पर्यावरणविद जयंत मोहन बताते हैं, “अटेनबोरो का काम हमें यह समझाता है कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन कितना नाजुक है। भारत जैसे जैव विविधता संपन्न देश में उनकी शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
भारतीय लेखक संरक्षण के विषय पर मुकुल शर्मा ने बताया, “उनके सफर ने भारतीय युवा लेखक और पत्रकारों को भी प्रेरित किया है ताकि वे पर्यावरणीय संकटों को उजागर करें और समाधान निकालने में सहायक बनें। एटेनबोरो के अनुभवों और विज्ञान आधारित दृष्टिकोण ने भारतीय समाज को प्रकृति के प्रति जागरूक करने में मदद की है।”
फिल्म निर्माता अनुजा राव ने कहा, “अटेनबोरो की प्रेरणा से भारत में कई वृत्तचित्र बने हैं जो असामान्य प्रजातियों की कहानी बयां करते हैं और संरक्षण की जरूरत को उजागर करते हैं। उनकी शैली और नैतिकता को अपनाकर भारतीय क्रिएटिव समुदाय ने भी संवेदनशील विषयों को बहस में लाना शुरू किया है।”
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अमित वर्मा ने बताया, “उनकी बचपन से की गई फोटोग्राफी और टेक्नोलॉजी के उपयोग ने हमें दिखाया कि कैसे वीडियो और चित्रों का इस्तेमाल कर वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। उनके प्रयासों ने भारत में भी पारिस्थितिकी के प्रति जनता की भागीदारी बढाई है।”
डेविड एटेनबोरो के सौ वर्ष पूरे होने पर, भारतीय समाज उनके इस योगदान का सम्मान करता है और उम्मीद करता है कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। उनकी प्रतिबद्धता, जागरूकता और कार्रवाई भारत समेत पूरे विश्व में संरक्षण के महत्व को रेखांकित करती है। उनके जीवन कार्य से प्रेरणा लेकर भारत में ठोस पर्यावरण नीति, संरक्षण अभियानों और जन जागरूकता अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।



