
वित्त मंत्रालय ने सरकारी खरीद को श्रम कानून अनुपालन से जोड़ा
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नई दिल्ली, 8 मई 2026: वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की खरीद नीति डिवीजन ने एक महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन जारी किया है, जिसमें सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, स्वतंत्र निकायों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) को निर्देशित किया गया है कि वे सरकारी खरीद में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। यह कदम विशेष रूप से श्रमिक संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए चार श्रम कोड्स के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ज्ञापन के अनुसार, अब उन फर्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो मजदूरों को समय पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा योगदान देने में विफल रहती हैं। उल्लंघन करने वाली कंपनियों को प्रतिबंधित करना और ब्लैकलिस्ट करना इस नीति का हिस्सा है, जिससे बाजार में अनुशासन स्थापित किया जा सके और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
इस नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी विभाग और उपक्रम यह सुनिश्चित करेंगे कि वे उन विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के साथ ही सौदा करें जो श्रम कानूनों का पूर्ण रूप से पालन करते हैं। इससे न केवल कानून का अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय महत्व का है क्योंकि यह श्रम सुधारों और सरकारी खरीद के क्षेत्र में एक समन्वित और जवाबदेह दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इससे पूर्व, कई बार कामगारों को उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिलने की शिकायतें आईं, जिन्हें अब प्रभावी रूप से रोका जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहल से न केवल श्रमिकों के अधिकार और कल्याण मजबूत होंगे, बल्कि इससे उन फर्मों को भी प्रतिस्पर्धा में फायदा मिलेगा जो कानूनी दायित्वों का पालन कर सही व्यवहार करती हैं। सरकार की इस नीति से एक पारदर्शी और जवाबदेह खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस ज्ञापन के माध्यम से तत्काल प्रभाव से क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा तथा सभी संबंधित संस्थाओं को नियमित तौर पर अनुपालन की रिपोर्टिंग करनी होगी। वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें प्रतिबंध लगाना और ब्लैकलिस्टिंग शामिल है, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त न की जाए।
प्रधानमंत्री की सामाजिक न्याय और श्रमिक उत्थान की पहल के अनुरूप यह कदम देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक जरूरी मोड़ साबित होगा। श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित कर सरकार ने एक मजबूत संदेश दिया है कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।



