
पुतिन की बढ़ती कमजोरी को दर्शाता एक कम ताकतवर विजय दिवस परेड
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मास्को: सुरक्षा चिंताओं के चलते इस वर्ष की विजय दिवस परेड सामान्य से कम भव्य और छोटी हुई, जो रूस के प्रमुख शहरों में युद्ध की बढ़ती हलचल और पुतिन सरकार की बढ़ती कमजोर स्थिति को दर्शाती है। रूस में हर साल 9 मई को देशभक्ति और युद्ध के विजय का जश्न मनाया जाता है, लेकिन इस बार की परेड में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के कारण इसकी परंपरागत भव्यता कम हो गई है।
रूस में चल रहे युद्ध की स्थिति और पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से शहरों में असामान्य सुरक्षा व्यवस्था देखी गई है। परेड की शारीरिक मौजूदगी में कटौती और सशस्त्र बलों की संख्या सीमित होना यह संकेत करता है कि युद्ध की चुनौतियां अब सिर्फ मोर्चे तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि देश के भीतरी हिस्सों में भी इससे जूझना पड़ रहा है।
मास्को और अन्य बड़े शहरों में सुरक्षा को लेकर चिंता इस बात का प्रमाण है कि रूसी नेतृत्व अब अपनी राष्ट्रीय राजधानी को भी किसी हमले या आतंकवादी गतिविधियों से सुरक्षित नहीं मानता। यह स्थिति पुतिन प्रशासन के लिए एक बड़ा राजनीतिक और सामरिक संकट भी है, क्योंकि युद्ध के प्रभाव सीधे उनकी लोकप्रियता और सत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विजय दिवस परेड की भव्यता में इस प्रकार की कमी रूस की अंदरूनी स्थिति पर भी प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि यह जनता के मन में अनिश्चितता और असुरक्षा की भावना पैदा करती है। इससे यह भी पता चलता है कि रूस अब युद्ध की पूरी तरह तैयारी में नहीं है और उसे भविष्य में और ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
इस परेड की घटी हुई उपस्थिति और शारीरिक सीमाएं न केवल पुतिन सरकार की कमजोर होती सामरिक स्थिति की पहचान कराती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि युद्ध के कारण राजधानी और अन्य बड़े शहर अब भी युद्ध के प्रभावों से बच नहीं पा रहे हैं। ऐसे में यह बात साफ है कि युद्ध का दायरा ना केवल सीमाओं तक सीमित है, बल्कि यह देश के भीतर भी एक स्थायी संकट का रूप लेता जा रहा है।
इस सबके बीच, स्थानीय नागरिक भी सुरक्षा कारणों और सरकार की नीतियों को लेकर चिंतित दिख रहे हैं। इस जटिल स्थिति में, रूस के लिए विजय दिवस का त्योहार अब केवल खुशी का नहीं, बल्कि सावधानी और असुरक्षा की निशानी बनकर रह गया है, जो पुतिन के नेतृत्व की कमजोर होती स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।



