
ऑडियो विजुअल और लाइटिंग उद्योग की वृद्धि में कंसर्ट इकॉनमी होगी प्रमुख भूमिका, विशेषज्ञों का कहना
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नई दिल्ली। भारतीय प्रो-ऑडियो विजुअल (Pro-AV) बाजार के तेजी से विकास के संकेत मिल रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों ने बताया कि इस क्षेत्र की वृद्धि में कंसर्ट इकॉनमी एक महत्वपूर्ण इंधन साबित होगी। वे अनुमान लगा रहे हैं कि प्रो-AV बाजार 2034 तक 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा, जो कि 3.9% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से विकसित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, संगीत कार्यक्रम, कॉर्पोरेट इवेंट, थियेटर और लाइव पर्फॉर्मेंस जैसी गतिविधियों के बढ़ते प्रमोशन से ऑडियो विजुअल उपकरणों और लाइटिंग उद्योग को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही डिजिटल और तकनीकी नवाचारों ने इस क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
कंसर्ट इकॉनमी का मतलब है उन सभी आर्थिक गतिविधियों से जो लाइव मनोरंजन उद्योग से जुड़ी हैं। इस उद्योग की बढ़ोतरी से न केवल उपकरणों की मांग बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इस बाजार में निवेश बढ़ने से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
इंडस्ट्री प्रतिनिधियों का कहना है कि भारत में मनोरंजन उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और युवा वर्ग की रुचि इसे और भी बढ़ावा दे रही है। यह बाजार न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की क्षमता को स्थापित करेगा।
इसके अलावा, सरकार की डिजिटल इंडिया पहल और विभिन्न राज्य सरकारों की सहयोगी नीतियाँ भी प्रो-AV उद्योग को प्रेरित कर रही हैं। तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान इस क्षेत्र के लिए कुशल पेशेवर तैयार कर रहे हैं, जो कि इस उद्योग के सतत विकास के लिए आवश्यक हैं।
निष्कर्षतः, कंसर्ट इकॉनमी की बढ़ती महत्ता से प्रीमियम ऑडियो, वीडियो और लाइटिंग उपकरणों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे कुल मिलाकर प्रो-AV उद्योग की समृद्धि सुनिश्चित होगी। इस विकास से भारतीय उद्योग विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएगा।



