
व्याख्या | जीनोम अनुक्रमण क्या है और जीनोम इंडिया परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा समर्थन प्राप्त ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ के तहत 10,000 भारतीय मानव जीनोम के अनुक्रमण (Sequencing) का कार्य शुरू हो चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य भारतीय जनसंख्या में पाए जाने वाले विभिन्न आनुवंशिक प्रकारों को समझना है। इससे इलाज और चिकित्सा प्रक्रियाओं को व्यक्ति विशेष की आनुवंशिक बनावट के अनुसार अनुकूलित किया जा सकेगा।
जीनोम अनुक्रमण से तात्पर्य हमारे डीएनए के पूरी तरह से नक्शा बनाने की प्रक्रिया से है, जिसमें यह पता चलता है कि हमारे शरीर के हर कोशिका में मौजूद जीन किस प्रकार से मिलकर हमारे शारीरिक और जैविक गुणों को निर्धारित करते हैं। भारत जैसे विशाल एवं विविधता से भरपूर देश में, विभिन्न जातीय समूहों और भाषाई पृष्ठभूमियों के कारण जीनोम में अनेकों भिन्नताएं पाई जाती हैं। इसीलिए, केवल वैश्विक सन्दर्भों में खोजे गए जीन-आधारित उपचार भारतीय आबादी के लिए हमेशा समान रूप से प्रभावी नहीं होते।
जीनोम इंडिया परियोजना से एक ठोस आधार मिलेगा, जिससे भारत के लिए विशेष रूप से विकसित उपचार तैयार किए जा सकेंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है। चिकित्सकों को ऐसा डाटा प्राप्त होगा जिससे वे बीमारियों की सही जनसंख्या आधारित प्रवृत्तियों को पहचान पायेंगे और रोगी के आनुवंशिक प्रोफाइल के आधार पर दवाइयाँ और उपचार सुझा सकेंगे।
विषय विशेषज्ञों के अनुसार, जीनोम अनुक्रमण से न केवल कैंसर या विरासत में मिलने वाली बीमारियों जैसे अल्जाइमर, थैलेसीमिया आदि के बेहतर उपचार की सम्भावना है, बल्कि इससे दवाइयों के दुष्प्रभावों को भी बहुत हद तक कम किया जा सकता है। यह परियोजना भारत में रेडिएशन, हृदय रोग, मधुमेह जैसे रोगों के अनुवांशिक कारणों को भी उजागर करेगी।
राज्य और केंद्र सरकारों के साथ मिलकर इस परियोजना को लागू किया जा रहा है। इसमें नेतृत्व भारतीय विज्ञान संस्थान और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के पास हैं। भविष्य में यह परियोजना भारत को वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा अनुसंधान में अग्रणी बनाएगी। जीनोम अनुक्रमण से अलग-अलग जनजातियों, संस्कृतियों और अनुवांशिक विरासतों का एक बड़ा डेटाबेस तैयार होगा जो चिकित्सा अनुसंधान के लिए अमूल्य संसाधन साबित होगा।
इस तरह, जीनोम इंडिया परियोजना न केवल भारत के चिकित्सा क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी होगी, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बीमारियों की व्यक्तिगत रोशनी में पहचान और उपचार की दिशा में यह पहल देश को स्वस्थ एवं समृद्ध भारत की ओर अग्रसर करेगी।



