
NIMHANS की रिपोर्ट में बढ़ती देखभाल: बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर माता-पिता की चिंता
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Bangalore, Karnataka | 27 जून 2024
हाल के वर्षों में तकनीकी उपकरणों का उपयोग बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है, लेकिन इसके साथ ही माता-पिता के लिए यह चुनौती भी बन गया है कि वे अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित कर सकें। कई माता-पिता ने यह समस्या सामने रखी है कि उनका बच्चों का तकनीक उपयोग उनके नींद, पढ़ाई और दैनिक जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
NIMHANS ने एक अध्ययन में पाया है कि बच्चे स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर पर बिताए समय के कारण कई बार अपनी अनिवार्य गतिविधियां छोड़ देते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर असर पड़ रहा है। विद्यालयीन प्रदर्शन में गिरावट और नींद की कमी जैसे मुद्दे भी इस रिपोर्ट में अंकित हैं।
अधिकांश माता-पिता ने यह स्वीकार किया है कि तकनीक के फायदे होते हुए भी, इसके अनुचित उपयोग से बच्चों की आदतें प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को स्क्रीन टाइम सीमित करने में कठिनाई हो रही है, खासकर तब जब बच्चे ऑनलाइन शिक्षा, खेल और सोशल मीडिया पर समय व्यतीत करते हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि समय प्रबंधन के लिए माता-पिता को सख्ती से नियम बनाना चाहिए और बच्चों के साथ संवाद बनाकर उन्हें सही दिशा देना चाहिए। साथ ही, बच्चों को अन्य शारीरिक और मानसिक गतिविधियों में भी सम्मिलित करना जरूरी है ताकि स्क्रीन टाइम नियंत्रित किया जा सके।
समाज एवं स्वास्थ्य संगठनों को भी तकनीक उपयोग पर जागरूकता फैलाने के लिए प्रयास बढ़ाने होंगे ताकि माता-पिता और बच्चे दोनों तकनीकी उपकरणों का स्वास्थ्यकर उपयोग कर सकें।
इस स्थिति को देखते हुए, विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि सही दिशा और नियंत्रण के साथ तकनीक का उपयोग किया जाए तो बच्चों के विकास में बाधा नहीं आएगी। इसलिए, परिवारों में संवाद को बढ़ावा देना और कानूनों तथा नीतियों के माध्यम से भी इस संबंध में उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।



