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जीई एयरोस्पेस ने तेजस के लिए छठा इंजन दिया


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नई दिल्ली स्थित, 27 अप्रैल 2024। भारतीय वायु सेना के लिए विकसित हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तेजस के लिए इंजन की आपूर्ति में देरी ने हाल ही में विवाद खड़ा कर दिया है। तेजस Mk-1A संस्करण के लिए इंजन वितरण की समयसीमा में बदलाव को लेकर वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह टिप्पणी उन्होंने पिछले सप्ताह बेंगलुरु में आयोजित एयरो इंडिया 2024 के दौरान की, जो पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

सूत्रों के मुताबिक, भारत में निर्मित तेजस विमान की अगली पीढ़ी Mk-1A के लिए इंजन सप्लाई में देरी कई कारणों से हो रही है, जिनमें वैश्विक सप्लाई चेन बाधाएं और तकनीकी अनुकूलन संबंधी चुनौतियां शामिल हैं। GE एयरोस्पेस, जो तेजस के लिए इंजन का निर्माण करता है, ने वर्तमान में छठा इंजन सुप्लाई किया है, लेकिन कुल आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए और इंजन निर्माण में अधिक समय लग रहा है।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, “एक आधुनिक लड़ाकू विमान की ताकत उसके इंजन में होती है। तेजस Mk-1A जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में इंजन की समय पर उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। हमारे लिए यह चिंता की बात है कि इंजन वितरण में देरी से हमारे राष्ट्रीय रक्षा लक्ष्यों पर प्रभाव पड़ सकता है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस Mk-1A में कई उन्नत तकनीकी फीचर्स हैं जो भारतीय वायु सेना की ताकत को बढ़ाएंगे। इस विमान में उन्नत औद्योगिक क्षमताओं के साथ-साथ बेहतर हथियार प्रणाली और रडार उपकरण भी मौजूद हैं। हालांकि, इंजन के देरी से परियोजना के समग्र समयरेखा पर असर पड़ा है।

जीई एयरोस्पेस ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा है कि वे भारत सरकार और HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के साथ मिलकर इंजन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि वे वैश्विक स्तर पर आपूर्तिकर्ताओं से बेहतर तालमेल बनाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उपाय कर रहे हैं।

इस मुद्दे के चलते सरकार के रक्षा मंत्रालय ने भी स्थिति पर करीबी नजर रखने का निर्णय लिया है। तेजस Mk-1A विमान भविष्य में भारत के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जाता है, इसलिए इसके समय पर निर्माण और वितरण को प्राथमिकता दी जाएगी।

एयरो इंडिया 2024 में इस विषय पर कई बैठकें और चर्चा भी हुईं जिनमें भारतीय वायु सेना, HAL, GE एयरोस्पेस और सरकारी अधिकारी शामिल थे। सभी पक्ष इस चुनौती से निपटने के लिए संयुक्त रणनीति बनाने को तैयार हैं।

भारत के लिए तेजस Mk-1A परियोजना शौर्य और तकनीकी उन्नति का प्रतीक है, और इंजन की आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं का त्वरित हल होना आवश्यक है ताकि भारत की वायु रक्षा प्रणाली मजबूत बनी रहे।

इससे स्पष्ट है कि तेजस विमान के इंजन वितरण में आई देरी को लेकर समाधान खोजने के लिए सभी हितधारक प्रतिबद्ध हैं और निकट भविष्य में इस मुद्दे पर सकारात्मक प्रगति की उम्मीद की जा रही है।


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