
चुनाव की घड़ी में शिक्षकों ने की पेंटिंग खराब स्कूलों को लेकर चिंता व्यक्त
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देश भर में चुनाव की तैयारी जोरों पर है और इसी बीच स्कूलों की दुर्दशा को लेकर शिक्षकों ने चिंता जताई है। मतदान नजदीक आते ही ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जिनमें स्कूलों की दीवारें और संपत्ति क्षतिग्रस्त पाई जा रही हैं। शिक्षकों का मानना है कि यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था के प्रति बहुत बड़ी अनादर की बात है, बल्कि इससे बच्चों के मनोबल और सीखने के माहौल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्थानीय शिक्षा अधिकारियों और चुनाव आयोग को इस संबंध में सतर्क होकर त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है। कई शिक्षकों ने बताया कि दीवारों पर ताले, पेंटिंग की छवि को खराब करने वाले संदेश लिखे जा रहे हैं, जिससे स्कूल परिसर प्रदूषित होकर अस्वच्छ नजर आता है। कई बार छात्र भी इन स्कूलों में आने से डरते हैं क्योंकि वातावरण प्रेरणादायक नहीं रह जाता।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि चुनाव के दौरान स्कूलों का उपयोग पोलिंग बूथ के रूप में होता है, इसलिए उनकी सुरक्षा और रखरखाव को लेकर बेहतर प्रबंध आवश्यक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मतदान प्रक्रिया के बाद स्कूल परिसर की मरम्मत और सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित माहौल मिल सके।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि वे इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं और संबंधित जिलों में स्थिति की समीक्षा कर समाधान ढूँढ़ रहे हैं। साथ ही, चुनाव आयोग ने भी आश्वासन दिया है कि स्कूलों की सुरक्षा को लेकर उनका फोकस रहेगा। ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों को ध्यान में रखते हुए आगामी चुनावों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
अनुभवी शिक्षकों तथा स्थानीय निवासियों ने यह भी कहा कि स्कूलों को केवल शिक्षा केंद्र के रूप में ही नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि समाज में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूल परिसर को स्वच्छ, सुंदर और सम्मानजनक बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी होनी चाहिए। ताकि आने वाली पीढ़ी बेहतर वातावरण में शिक्षित हो सके।
इस प्रकार चुनाव की घड़ी में स्कूलों की दुर्दशा को लेकर शिक्षकों की चिंता वाजिब है। इस विषय पर शीघ्र ही ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है जिससे शिक्षा का वातावरण प्रभावित न हो और बच्चे बिना भय के सीखने की प्रक्रिया में पूरी तरह जुड़ सकें। स्कूलों की सुरक्षा तथा मरम्मत से जुड़ी जिम्मेदारियों को चुनाव आयोग, शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन और समाज के समन्वय से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।



