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मार्च में भारत के कच्चे तेल के आयात में लगभग 17% की गिरावट: डेटा


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नई दिल्ली: भारत में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के प्रचार-प्रसार के बीच, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात में मार्च महीने में 20.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह विकास ऊर्जा क्षेत्र में देश के विविधीकरण प्रयासों का स्पष्ट संकेत है।

सरकारी और उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारत ने हाल के वर्षों में ऊर्जा के अधिक स्थायी और स्वच्छ विकल्पों की तरफ अपना रुख मजबूत किया है। पाइपलाइन के माध्यम से गैस वितरण को बढ़ावा देना इस रणनीति का केंद्र बिंदु है। लेकिन घरेलू मांग के बढ़ने और कई क्षेत्रों में आपूर्ति की कमी के कारण एलएनजी आयात में बढ़ोतरी महत्वपूर्ण रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि मार्च में एलएनजी आयात में 20.5 प्रतिशत की वृद्धि भारतीय घरेलू एवं औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गैस की बढ़ती जरूरत को दर्शाती है। यह वृद्धि न केवल ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाती है, बल्कि जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को भी कम करती है।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने भी इस प्रवृत्ति को सार्वजनिक किया है जहां उन्होंने बताया कि पाइपड गैस नेटवर्क का विस्तार तथा सरकार की नीतियां, विशेषकर ग्रीन एनर्जी की ओर ध्यान केंद्रित करना, एलएनजी के बढ़ते आयात में सहायक रहे हैं।

भारत के ऊर्जा विशेषज्ञ रश्मि दीक्षित कहती हैं, “गैस के सहायक स्रोतों, जैसे एलएनजी आयात, में वृद्धि देश के ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है। साथ ही, पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा और आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करेगा।”

हालांकि देश की ऊर्जा खपत में कोयला और पेट्रोलियम की हिस्सेदारी अभी भी अधिक है, लेकिन एलएनजी आयात में यह उल्लेखनीय वृद्धि स्पष्ट संकेत है कि भारत हरित ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

सरकार ने भी यह सुनिश्चित किया है कि पाइपलाइन के विकास के साथ-साथ एलएनजी टर्मिनलों की संख्या और क्षमता में भी वृद्धि हो ताकि आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी न हो। इस कदम से न केवल घरेलू उद्योगों को लाभ मिलेगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प उपलब्ध होंगे।

मौजूदा आर्थिक और पर्यावरणीय मांगों के बीच, भारत की ऊर्जा नीति में इस बदलाव को देश के लिए एक सकारात्मक उपलब्धि माना जा रहा है। भविष्य में भी यह प्रवृत्ति जारी रखने के लिए विभिन्न मामले में योगदान दिया जाएगा, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों में सुधार होगा।


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