
भारतीय दूध उत्पादन पर भीषण गर्मी का सख्त इम्तिहान
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नई दिल्ली। भारत में दूध उत्पादन, जो विश्व में सबसे अधिक है, वर्तमान में तेज गर्मी की मार झेल रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अत्यधिक तापमान की वजह से गायें कम खाती हैं, जिससे उनकी दूध उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। इससे न केवल दूध की मात्रा घटती है, बल्कि जनसंख्या वृद्धि में भी कमी आ रही है।
वेटरनरी विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी के प्रभाव से गायों का भूख कम होना सामान्य है। इससे उनकी दूध देने की क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। गर्मी में गायें अधिक थक जाती हैं और उनका शरीर अपनी ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा तापमान को नियंत्रित करने में लगाता है। इसके परिणामस्वरूप भोजन का उचित पाचन नहीं हो पाता और दूध उत्पादन में कमी आती है।
इसके अलावा, गायों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है। अधिक गर्मी की वजह से गर्भधारण की दर घटती जा रही है, जिससे अगले पीढ़ी की संख्या कम होने का खतरा बढ़ रहा है। पशुपालकों की भी स्थिति चिंताजनक हो रही है क्योंकि वे जानवरों को ठंडा रखने और उनकी उर्वरता सुनिश्चित करने के लिए खर्चे बढ़ा रहे हैं। पशुशालाओं में विशेष प्रकार के कूलिंग सिस्टम, जल भंडारण और आहार की गुणवत्ता में सुधार लाने की कोशिशें की जा रही हैं।
कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के कारण यह चुनौती और गहरी हो रही है। उन्होंने नवाचार और तकनीकी उपायों पर जोर दिया है ताकि किसानों को मदद पहुँचाई जा सके। इनमें बेहतर छाया व्यवस्था, पानी की पर्याप्त व्यवस्था, और पौष्टिक आहार प्रदान करना महत्वपूर्ण कदम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या का ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में भारत की दूध उत्पादन क्षमता पर गंभीर संकट आ सकता है, जो कि देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिति पर भारी असर डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार, शोध संस्थान और किसान मिलकर इस चुनौती का सामना करें।
कुल मिलाकर, भारत की मिल्क सेक्टर को इस चरम गर्मी से उत्पन्न समस्याओं का सामना करने के लिए तुरंत और प्रभावी उपायों की आवश्यकता है। तभी जाकर देश अपनी वैश्विक दूध उत्पादक की भूमिका को बरकरार रख सकेगा और पशुपालन क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित कर पाएगा।



