स्वास्थ्य

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से दुर्लभ रोग उपचार पर ₹50 लाख की सीमा पुनर्विचार करने को कहा


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दिल्ली, दिल्ली | 27 अप्रैल 2024

दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश प्रथिभा एम. सिंह ने दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों और उनके अभिभावकों द्वारा दायर की गई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को ₹50 लाख की सीमित राशि पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश ने इस सीमा को चुनौती देते हुए कहा कि दुर्लभ रोगों के उपचार में निरंतरता और लगातार चिकित्सकीय देखभाल अत्यंत आवश्यक हैं, और यह राशि अक्सर इन रोगों की महंगी दवाओं और उपचार के खर्चों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त साबित होती है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को मुफ्त एवं लगातार उपचार की आवश्यकता होती है, जो कि ₹50 लाख की निर्धारित सीमा में सीमित करना न्यायसंगत नहीं है। कई बार इन रोगों का इलाज काफी महंगा होता है और उसमें वर्षों लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि उपचार में किसी भी प्रकार की बाधा मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।

न्यायाधीश प्रथिभा ने सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में एक व्यापक एवं समावेशी नीति बनानी चाहिए जो दुर्लभ रोगों के इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा, ‘स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य मरीजों को निरंतर और बिना किसी बाधा के इलाज उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि उन्हें आर्थिक सीमा में कैद करना।’

इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिए कि वे सघन समीक्षा करें कि क्या वर्तमान सीमा रोगियों की जरूरतों के अनुरूप है और यदि आवश्यक हो तो इसे बढ़ाया जाए। इसके साथ ही, सरकार से यह भी कहा गया कि वे दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए विशेष फंड तैयार करें जिससे कि इन मरीजों को बिना किसी वित्तीय चिंता के बेहतर इलाज मिल सके।

यह निर्णय उस समय आया है जब देश में दुर्लभ रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ रही है और मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों ने भी केन्द्र सरकार से अपील की है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं ताकि दुर्लभ रोगों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा सकें।

स्थानीय स्वास्थ्य संगठनों एवं चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा केंद्र से पुनर्विचार करने को कहा जाना इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो देश भर के दुर्लभ रोग मरीजों के लिए राहत की खबर साबित होगा।

कुल मिलाकर, यह सुनवाई दुर्लभ रोगों के उपचार में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है, जहां मरीजों को वित्तीय बाधाओं के बिना लगातार इलाज उपलब्ध हो सकेगा और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा। अदालत का यह कदम समाज के कमजोर वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।


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