
रुपया 1 पैसे की तेजी के साथ 94.15 पर बंद हुआ, डॉलर के मुकाबले मजबूती दर्ज
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नई दिल्ली: विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 94.15 पर बंद हुआ, जो कि पिछले स्तर से 1 पैसे की बढ़त दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि रुपया शुरुआती कारोबार में कुछ नुकसान के साथ शुरू हुआ था, लेकिन अंततः उसने हिस्सेदारी के दबाव के कारण अपने नुकसान को कम कर लिया।
विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने बताया कि INR/USD जोड़ी ने शुरुआती नुकसान को कम किया, किन्तु समग्र बाजार का रुख नकारात्मक ही रहा। इसका मुख्य कारण भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की तेज बिक्री और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रही, जिन्होंने स्थानीय मुद्रा की मजबूती को सीमित कर दिया।
वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, एफआईआई के बिकवाली के प्रभाव से विदेशी मुद्रा बाजार में अविश्वास बना हुआ है। भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा भारी मात्रा में स्टॉक्स बेचने से रुपया दबाव में रहा। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में आज भी ऊंचा स्तर बना हुआ है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव पड़ रहा है और इस कारण भी रुपये की बढ़त सीमित रही।
उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल के दामों में तेजी से भारत जैसी आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता है क्योंकि कीमतों के बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपये की मांग कमजोर पड़ती है। इसके विपरीत, डॉलर की वैश्विक मजबूती भी भारतीय रुपये पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल के दाम और एफआईआई की बिकवाली इसी प्रकार जारी रही तो रुपये में बड़ी तेजी की संभावना कम होगी। साथ ही, विदेशी पूंजी प्रवाह में अनिश्चितता बनी रहने से बाजार में हलचल बनी रहेगी।
हालांकि, केंद्रीय बैंक और वित्तीय नियामक संस्थाओं की नीतिगत भूमिका की भी बड़ी भूमिका होती है, जो बाजार के मूड को प्रभावित करती हैं। आने वाले कुछ सप्ताह में आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक स्थिति की समीक्षा से रुपया के रुख का सही अनुमान लगाया जा सकता है।
संक्षेप में, आज का कारोबार दर्शाता है कि रुपया में कुछ सुधार अवश्य हुआ है, परंतु बाहरी और आंतरिक आर्थिक दबावों के चलते समग्र रुपया अभी मजबूती की ओर स्थिर नहीं हो पाया है। मुद्रा निवेशकों और व्यापारियों के लिए यह समय सावधानी और सतर्कता का है।



